54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
( ii ) भारत में खनिज संसाधनो के संबंध में सरकार की नीति की परिभाषा करते समय 12 मार्च, 1945 को विधान सभा में दिए गए वक्तव्य की दृष्टि से खनिजों पर नियंत्रण स्थापित करने के प्रयोजन के लिए क्या विधान को हाथ में लिया गया है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः ( i ) केंद्रीय सरकार द्वारा भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अधिक विस्तार का कार्य हाथ में लिया गया है। सर्वेक्षण के उच्च राजपत्रित कर्मचारीवर्ग की संख्या युद्ध से पूर्व 27 से बढ़ाकर 102 कर दी गई है जिसमें विशेषज्ञ तथा भूभौतिकीविद् खनन अभियंता शामिल किए गए हैं।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के कार्यों और संगठन को दर्शाती पुस्तिका सदन के पुस्तकालय में उपलब्ध है।
( ii ) प्रांतीय सरकारों से इस मामले में परामर्श लिया गया और उनके उत्तर विचाराधीन हैं।
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ऽभारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की
उपयोगिता शाखा का उन्मूलन
37. श्री के. सी. नियोगीः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि ऐसी वे क्या परिस्थितियाँ हैं जिन्होंने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की उपयोगिता शाखा के उन्मूलन की ओर अग्रसर किया।
(ख) क्या यह सच है कि ऊपर बताई गई शाखा से सम्बद्ध सलाहकार समिति से किसी समय यह आशा की गई थी कि खनिजों के संदर्भ में वह युद्धोत्तर प्लानिंग कमेटी के रूप में कार्य करें?
(ग) क्या कोई समिति खनिजों के बारे में युद्धोत्तर नीति से संबंधित प्रश्नों के विचार में लगी हुई है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (क) युद्ध के प्रयत्नों को प्रोत्साहित करने के लिए देश के अविकसित खनिज संसाधनों की उपयोगिता की दृष्टि से उपयोगिता शाखा स्थापित की गई थी। युद्ध की समाप्ति होने पर देश के युद्धकालीप उत्पादन से हटकर खनिज विकास की योजनाबद्ध नीति की ओर बल दिया गया। इस प्रकार
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1945, 5 फरवरी, 1946, पृष्ठ 483