371 कोयला खानों में गोरखपुर श्रमिकों के संबंध में लेखे - Page 78

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 63

(ग) इस योजना के अन्तर्गत उम्मीदवारों के प्रशिक्षण और अन्य व्यय अपने-अपने नियोक्ताओं अर्थात, निजी उद्योग, केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों और भारतीय रियासतों, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा वहन किए जाते हैं। इस योजना में निजी उद्योग के उम्मीदवारों को केंद्रीय सरकार से वित्तीय सहायता मिलती है जहां प्रशिक्षण किसी नए उद्योग या ऐसे उद्योग का हो जिसका विकास राष्ट्रीय हित में वांछनीय समझा जाता है और नियोक्ता पूरी लागत वहन करने के लिए सक्षम नहीं होता।

वर्ष 1946-47 में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियो में से चुने गए उम्मीदवारों तथा कुछ निजी उद्योग के थोड़े से उम्मीदवारों को दी गई सहायता अनुमानतः 1,01,680 रुपये है।

वर्ष 1946-47 में प्रांतीय सरकार के कर्मचारियों में से चुने गए उम्मीदवारों के संबंध में प्रांतीय सरकारों की लागत लगभग 3,60,000 रुपयें है।

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ऽकोयला खानों में गोरखपुर श्रमिकों के

संबंध में लेखे

31. श्री के. सी. नियोगी ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या कोयला खानों में गोरखपुर के श्रमिकों की भर्ती और उन्हें रोजगार दिलाने के कारण व्यय की लेखा-परीक्षा ही की जा चुकी है_ क्या लेखापरीक्षा पूर्णतया व्यवस्थित पाई गई ह़ै और किस तारीख तक लेखा-परीक्षा की गई_ और

(ख) श्रमिक बल के प्रभारी अधिकारी का नाम और पद क्या है और उसके सचिव का क्या नाम है_ वे परिलब्धियां क्या हैं जिनके क्रमशः वे अधिकारी हैं और प्रभारी अधिकारी की वित्तीय शक्ति कहां तक सीमित है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) पहला भाग- जी हां और लेखाओं को व्यवस्थित रूप में बताया गया है।

(ख) पहला भाग, श्री एच. जे. वाल्श, उप निदेशक, श्रमिक सप्लाई (कोयला)। उनके साथ कोई भी सचिव सम्बद्ध नहीं है।

दूसरा भाग- उसका वेतनमान 1,925-50-2,075 रुपये है। उसे यह अधिकार दिया गया है कि वह ऐसी अधिकतम दर पर व्यय कर सकते हैं जो 60 रुपये मासिक प्रति

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1946, 11 फरवरी, 1946, पृष्ठ 773