376 कोयला खानों में महिलाओं को काम करने से रोका जाना - Page 83

68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्भारतीय कार्मिक संघ अधिनियम, 1926 में और संशोधन करने वाले विधेयक

को पुरः स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए।य्

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः श्रीमन् मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूं।

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ऽकोयला खानों में महिलाओं को

काम करने से रोका जाना

406. प्रो. एन. जी. रंगा ः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या सरकार महिलाओं को कोयला खानों में काम करने से रोकने का प्रस्ताव करती है क्योंकि अब युद्ध समाप्त हो गया है_ और

(ख) क्या सरकार की ऐसी कोई योजना है कि ऐसी महिलाओं को कोई वैकल्पिक रोजगार दिलाया जाए जो अपने सुदूर गांवों से लाई गई हैं अथवा उनके लिए निःशुल्क घर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए और उन्हें उस ऋण से मुक्त किया जाए जो उन्होने खानों में काम करते हुए इस आशा से लिया था कि वे खानों में काम करने की मजदूरी की बचतों से ऋण चुका देंगी?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) सरकार का ऐसा इरादा नहीं है कि महिलाओं को कोयला की खानों में रोजगार पाने से बिल्कुल मना किया जाए। फिर भी उनको भूमिगत स्थलों में काम करने से 1 फरवरी, 1946 से रोक दिया गया है।

(ख) केंद्रीय सरकार की कल्याण निधि के अधिकारियों ने यह निर्णय लिया है कि कोयला क्षेत्रों में सब्जियों के फार्म खोले जाएं और नियोक्ताओं के विभिन्न खनन संघों तथा बंगाल और बिहार की प्रांतीय सरकारों से कहा गया है कि भूमिगत स्थलों से काम से हटाई गई महिलाओं को शीघ्र ही वैकल्पिक रोजगार दिलाया जाए। इनमें से अधिकांश महिलाओं को कोयला क्षेत्रों की सतह पर पहले ही काम पर लगा लिया गया है।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1946, 25 फरवरी, 1946, पृष्ठ 1427