70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(घ) क्या सरकार इस बात से अवगत है कि उन लोगों को काम पर लगाने के लिए भवन निर्माण अथवा भवन व्यापार अधिक प्रोत्साहन देता है जो सरकारी सेवा से हटा दिए गए है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां। चूंकि हमारे पास निजी व्यक्तियों द्वारा गत छह वर्ष में निर्मित इमारतों की संख्या नही है, अतः उक्त कथन का समर्थन अथवा खंडन करना संभव नही है। परन्तु मैं यह बताना चाहूगा कि भवन निर्माण की सामग्री के उपयोग के लिए प्रतिबन्ध 1941 के अन्तिम छः महीनों तक लागू नहीं किए गए थे।
(ख) शायद माननीय सदस्य के मस्तिष्क में निजी इमारत का संदर्भ है। भारत सरकार ने हाल ही में भारत भर में निजी इमारत को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं और यह प्रयास विशेषकर बम्बई और कलकत्ता के लिए नहीं किया गया है।
सरकार ने ऐसे निदेश वापस ले लिए हैं जो सरकार ने प्रांतीय सरकारों को जारी किए थे जिनका संबंध भवन निर्माण के प्रतिबन्ध को लागू किए जाने से था। सरकार ने प्रांतीय सरकारों को सामान्यतया अपनी शक्ति के भीतर सभी साधनों से निजी इमारतें बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। सरकार ने ईटें देने के लिए विशेष निदेश दिए हैं और ऐसी उच्च भवन निर्माण सामग्री यथा सीमेंट, स्टील, लकड़ी आदि में वृद्धि की है जो भारत सरकार के अधीन है तथा अब ये वस्तुएं निजी निर्याताओं को उपलब्ध की गई हैं।
सरकार ने यह भी निर्णय किया है कि दिल्ली में भवन निर्माण अथवा भवन उद्योग में कार्यरत प्रतिनिधियों की मार्च, 1946 के प्रथम सप्ताह में बैठक आयोजित की जाए ताकि ऐसे कारकों पर विचार-विमर्श किया जा सके जो इस देश में निजी भवन निर्माण की प्रगति में अभी भी बाधा है।
(ग) भारत सरकार का विश्वास है, कि इन शिथिलताओं से भवन निर्माताओं को भविष्य मे इमारतें बनाने में सुविधा होगी।
(घ) भारत सरकार ने औद्योगिक कर्मियों के लिए आवास-गृह के निर्माण हेतु प्रोत्साहन देने के निमिल एक अल्पावधि योजना प्रांतीय सरकारों को भेजी है तथा उस योजना का संबंध शहरी क्षेत्रों में उन अन्य कामगारों से है जो कम किराया भी नहीं दे पाते। इस योजना में केंद्र सरकार की राजसहायता निहित है बशर्त इतनी राजसहायता प्रांतीय सरकारें दें और इसका उल्लेख वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में करेंगे।