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विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 71

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ऽयुद्धकालीन अस्थायी ढांचों के

आवासीय उपयोग के बारे में

470. श्री मनु सूबेदार ः क्या माननीय श्रम सदस्य इस तथ्य से अवगत हैं कि ग्रेट ब्रिटेन में गृह-निर्माण के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं_ और यदि हां तो वे कानून क्या हैं_ और

(ख) क्या सरकार 23 जनवरी, 1946 के स्टेट्समैन द्वारा दिए गए सुझावों के बारे में अपनी नीति का उल्लेख करना चाहेगी -

फ्इसलिए सरकार को यह विचार करने के लिए सलाह दी जाएगी कि जब तक आपूर्ति और माँग का नियम स्वयं अपने पर बल न दे तो युद्ध काल में अस्थायी रूप से बनाए गए आवास गृहों को रहने योग्य आवास घोषित किए जाएंय्?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क्र) जी हां। इन कानूनों का पूर्णतया उल्लेख ब्रिटिश सूचना मंत्रालय की पुस्तिका संख्या आर 520 में किया गया है और उसकी एक प्रति सदन के पुस्तकालय में उपलब्ध है।

(ख) 23 जनवरी, 1946 को स्टेट्समैन द्वारा दिया गया सुझाव कलकत्ता में निर्मित अस्थायी इमारतों के संबंध में था और मैं यह समझता हू कि माननीय सदस्य उन्ही इमारतों के बारे में सरकार की नीति जानना चाहते हैं। ये केवल केंद्र सरकार के सिविल कार्यालयों के लिए उन निर्मित इमारतों से संबंधित हैं जो निस्संदेह उस समय तक प्रयोग के लिए रखे जाएंगे जब तक वे हमारी आवश्यकताओं से अधिक न हो जाएं।

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# भारत में फैक्टरी कामगारों के कार्य करने के घंटे

481. श्री वादीलाल लल्लू भाई ः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) कोयला खानों और बाग़ान को शामिल करते हुए विभिन्न उद्योंगों के अनुसार भारत में फैक्टरी कामगारों के कार्य करने के प्रतिदिन घंटे वास्तव में क्या हैं_

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1946, 29 फरवरी, 1946, पृष्ठ 1427 # वही, पृष्ठ 1428