विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 77
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मेरे माननीय मित्र इस बात के लिए स्वतंत्र हैं कि वे चर्चा से कोई भी निष्कर्ष निकालें।
मौलाना जफर अली खां ः क्या माननीय सदस्य यह जानते हैं कि चारों ओर यह भावना व्याप्त है कि मुसलमानों की नियुक्ति के संबंध में सरकार सौतेली मां का व्यवहार करती है।
श्री अहमद ई. एच. जफर ः इस प्रश्न के भाग (क) के उत्तर में माननीय सदस्य ने कहा कि फ्यह प्रशासकीय सुविधा की दृष्टि से किया गया है।य् क्या माननीय सदस्य के लिए सुविधा है कि मुसलमानों को नियुक्ति से हटाने की सुविधा को स्वीकार किया जाए?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं समझता हूं कि यह ऐसी सरल अभिव्यक्ति है कि प्रत्येक व्यक्ति को उसे समझना चाहिए।
सभापति ः शांति, शांति - अगला प्रश्न पूछा जाए।
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ऽश्रम विभाग सचिवालय में
मुस्लिम राजपत्रित अधिकारी
- श्री मोहम्मद रहमत-उल्ला ः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या श्रम विभाग सचिवालय में मुस्लिम उम्मीदवारों की राजपत्रित अधिकारी के पदों पर उन्नति की गई है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः श्रम विभाग में 49 सचिवालय राजपत्रित अधिकारी हैं जिनमें से 9 मुसलमान हैं।
श्री अहमद ई. एच. जफर ः क्या इसका यह अर्थ नहीं है कि 25 प्रतिशत के अनुपात के अनुसार मुसलमानों की पदोन्नति नहीं की जाती?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं नहीं जानता कि वह नियम लागू होता है।
श्री अहमद ई. एच. जफर ः 49 पदों में से 9 पद, क्या यह मुस्लिम सम्प्रदाय के लिए उचित है कि उन्हें पदों में इतना कम प्रतिशत मिले?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं समझता हूं कि यह ऐसा मामला नहीं है जो साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व के अनुपात से संबंधित है।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 3, 1946, 28 फरवरी, 1946, पृष्ठ 1668