80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(क) 1939 से अब तक वर्ष प्रति वर्ष भारत में औद्योगिक कामगारों की संख्या क्या है तथा कोयला खानों और बागान को सम्मिलित करते हुए मौलिक उद्योगों में उनका वितरण क्या है_
(ख) 1939 से अब तक वर्ष प्रति वर्ष विभिन्न उद्योगों में भारत के फैक्टरी-कामगारों की मासिक आय कितनी है जिसमें महंगाई भत्ता और बोनस शामिल नहीं किया गया है_
(ग) 1939 से अब तक वर्ष प्रति वर्ष भारत में औद्योगिक कामगारों को दिये गये महंगाई भत्ते और बोनस के ऑकड़े क्या है जो ( i ) अलग-अलग उद्योगों तथा ( ii ) अलग-अलग औद्योगिक केद्रों के अनुसार हों_ और
(घ) क्या श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि कार्मिक संघों की कुल सदस्यता की दृष्टि से औद्योगिक कामगारों की आय में युद्धकालीप वृद्धि, यदि कोई हो, का क्या प्रभाव रहा और उनकी आर्थिक दशा क्या रही?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) सदन के पटल पर एक विवरण रखा जाता है। 1945 के आंकड़े अभी तक उपलब्ध नहीं हं।
(ख) 1939, 1940, 1941 और 1943 के दौरान फैक्टरी कामगारों के प्रतिमास औसतन आय के ऑकड़ों को दर्शाने वाला विवरण सदन के पटल पर रखा जाता है। इसमें नकद भुगतान किया गया महंगाई भत्ता शामिल है। इनके अलावा आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ये आँकड़े लगभग आँकड़े हैं क्योंकि उनका संकलन किए गए कुल भुगतानों के आधार पर किया गया है और इसमें वर्ष में कार्य दिवसों की संख्या, कार्य करने वाले घंटों की संख्या आदि जैसे कारक नहीं दिए गए है।
1942 के आंकड़े नहीं दिए गए हैं क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि उपलब्ध आँकड़ों में से कौन से आंकड़े ऐसे हैं जिनमें महंगाई भत्ता शामिल है और कौन से ऐसे हैं जिनमें महँगाई भत्ते शामिल नहीं हैं।
(ग) पूरी सूचना उपलब्ध नहीं है और सरकार के अनुसार इस सूचना को एकत्र करने और सभा पटल पर रखने में जो समय लगेगा वह परिणाम के अनुरूप नहीं होगा।
(घ) फैक्टरी कामगारों की औसत आय के आँकड़े इस प्रश्न के भाग (क) के संबंध में दिए जा चुके हैं। सदस्यता तथा कार्मिक संघों की सामान्य निधियों को दर्शाते हुए विवरण सदन के पटल पर रखे जाते हैं। सरकार यह बताने की स्थिति में नहीं है कि सदस्यता में वृद्धि तथा आय के वृद्धि बढ़ी हुई मजदूरी अथवा अन्य किन्ही कारणों से हुई है।