72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
कर अपने आपको तरोताजा कर लिया था और सशक्त हो गया था। बोधि प्राप्ति
के उद्देश्य से ध्यान के लिए इस प्रकार उसने अपने आपको तैयार कर लिया
था।
- बोधि प्राप्ति के लिए गौतम को चार सप्ताह तक लगातार ध्यान-मग्न रहना पड़ा।
अन्तिम अवस्था तक पहुँचने के लिए उसे चार अवस्थाएँ पार करनी पड़ीं।
- प्रथम अवस्था वितर्क और विचार प्रधान थी। एकान्तवास के कारण उसने इसे
बड़ी सरलता से प्राप्त कर लिया।
दूसरी अवस्था में उसने एकाग्रता को सम्मिलित कर लिया।
तीसरी अवस्था में उसने समचित्तता और जागरूकता का समावेश कर लिया।
चौथी और अंतिम अवस्था में उसने पवित्रता को समचित्तता में और समचित्तता
को जागरूकता में शामिल किया।
- इस बार जब उसका चित्त एकाग्र, पवित्र, क्लेशरहित ग्रहणशील, दक्ष, दृढ़,
आवेगमुक्त हो गया, तब गौतम ने अपना सारा ध्यान उस समस्या के समाधान
पर एकाग्र किया, जो उसे परेशान कर रही थी।
- चौथे सप्ताह के अंतिम दिन की रात को उसे कुछ आशा की किरण दिखाई
दी। उसे स्पष्ट दिखाई दिया कि उसके सामने दो समस्याएँ हैं_ पहली समस्या है
कि संसार में दुःख है और दूसरी समस्या है कि दुःख से छुटकारा कैसे पाया
जाए, ताकि मानव-समुदाय सुखी हो सके।
- इस प्रकार अंत में, चार सप्ताह के ध्यान के पश्चात्, अंधकार हट गया और
प्रकाश प्रकट हुआ। अविद्या का नाश हुआ और ज्ञान प्रकट हुआ। उसने एक
नया मार्ग देखा।
3. नए धम्म का आविष्कार
- नया प्रकाश प्राप्त करने के लिए गौतम जब ध्यानस्थ हुआ, तो उस समय उस
पर सांख्य-दर्शन का अत्यधिक प्रभाव था।
- उसने सोचा कि संसार में दुःख और कष्ट के अस्तित्व में कोई विवाद नहीं
है।
- फिर भी गौतम की रुचि यह पता लगाने में थी कि दुःख से छुटकारा कैसे
पाया जाए, सांख्य-दर्शन के पास इस समस्या का कोई उत्तर नहीं था।