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- इसलिए दुःख और कष्ट से कैसे छुटकारा पाया जाए, इसी समस्या पर उसने
सारा ध्यान लगाया।
- स्वभावतः पहला प्रश्न उसने अपने आपसे किया-‘‘किसी व्यक्ति के दुःख और
कष्ट के क्या कारण हैं?’’
- उसका दूसरा प्रश्न था-‘‘कष्ट से छुटकारा कैसे पाया जाए?’’
- इन दोनों प्रश्नों का उसने एक सही उत्तर पा लिया, जिसे सम्यक सम्बोधि
(सम्यक ज्ञान) कहा जाता है।
- इसी प्रकार उस पीपल के वृक्ष, जिसके नीचे सिद्धार्थ गौतम को महाज्ञान की
प्राप्ति हुई थी, उस को बोधि-वृक्ष के नाम से जाना जाता है।
4. बोधिसत्व गौतम सम्बोधि के पश्चात् सम्यक सम्बुद्ध बुद्ध हो गए
- ज्ञान-प्राप्ति से पहले गौतम केवल एक बोधिसत्व थे। महाज्ञान ज्ञान-प्राप्ति के
बाद वह बुद्ध हो गये।
बोधिसत्व कौन और क्या होता है?
बोधिसत्व वह प्राणी होता है, जो बुद्ध बनने के लिए प्रयत्नशील होता है।
एक बोधिसत्व बुद्ध कैसे बनता है?
बोघिसत्व को लगातार दस जन्मों तक बोधिसत्व रहना पड़ता है। बुद्ध बनने के
लिए एक बोधिसत्व को क्या करना होता है?
- अपने पहले जन्म में वह मुदिता (प्रसन्नता) प्राप्त करता है। जिस प्रकार सुनार
चाँदी के मैल को दूर करता है, उसी प्रकार बोधिसत्व अपने चित्तमल को दूर
कर प्रमादी से संयमी बनकर संसार को इस प्रकार प्रकाशित करता है, जैसे
बादल रहित चन्द्रमा इस लोक को प्रकाशित करता है। उसके मन में मुदिता
उत्पन्न होती है और इसे इस प्रकार का बोध होता है तथा सभी प्राणियों के
कल्याण के लिए उसके मन में उत्कट इच्छा उत्पन्न होती है। 7. अपने दूसरे जन्म में वह विमला (विशुद्धि) प्राप्त करता है। इस समय तक
बोधिसत्व काम-वासना के सभी विचार छोड़ चुका होता है। वह सबके प्रति
कारुणिक होता है। वह आदमियों के अवगुणों को न बढ़ावा देता है न ही उनके
गुणों को कम करता है।