103
- अतः बुद्ध ब्रह्मा सहम्पति के निवेदन से सहमत हो गये और संसार को अपने मत
का उपदेश देने का निश्चय किया।
2. ब्रह्म सहम्पति द्वारा शुभ समाचार की घोषणा
- तब, ब्रह्मा सहम्पति ने यह सोचते हुए कि, ‘‘मैं बुद्ध को जन-समुदाय को अपने
धम्म का उपदेश देने को सहमत कराने के लिये प्रेरित करने का माध्यम रहा हूँ,’’
अत्यन्त प्रसन्नता अनुभव की। उन्होंने बुद्ध को प्रणाम किया, उनकी प्रदक्षिणा की,
उनका अवलोकन किया और विदा हो गये।
- वापस लौटते समय वह संसार के समक्ष यह घोषणा करते रहे ‘‘शुभ समाचार को
सुन आनन्दित होओ। बुद्ध हमारे भगवान ने, संसार की सभी बुराइयों और दुःखों
का मूल कारण जान लिया है। वे मुक्ति का मार्ग भी जानते हैं।’’
- ‘‘बुद्ध क्लान्त और शोक-संतप्त के लिये सान्त्वना लायेंगे। वे युद्धों से त्रस्त लोगों
को शान्ति प्रदान करेंगे। वे हिम्मत हारे हुए लोगों को हिम्मत प्रदान करेंगे। वे दलित
और उत्पीडि़त लोगों को विश्वास और आशा प्रदान करेंगे।’’
- आज जो जीवन की मुसीबतें झेलते हैं, आप जिन्हें संघर्ष करना और झेलना पड़ता है,
आप जिन्हें न्याय की लालसा रहती है, शुभ समाचार को सुनकर आनंदित होओ।
- ‘‘आप जो घायल हैं अपने घावों को भरें। आप जो भूखे हैं अपनी भूख को तृत्प
करें। आप जो वलान्त हैं, विश्राम करें और आप जो प्यासे हैं, अपनी प्यास को
बुझायें। आप जो अन्धकार में हैं, प्रकाश को तलाश करें। आप जो परित्यक्त हैं,
वे अब प्रसन्न हो जायें।’’
- ‘‘उनके मत में जो परित्यक्त या लावारिस हैं, उन्हें अपना बना लेने की उत्कंठा
को उत्पन्न करने के लिये प्रेम (मेत्ता) है। पतितों को ऊपर उठाने के लिए उदात्तता
सदैव विद्यमान है। और पददलितों को उनके प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाने के
लिये समानता है।’’
- ‘‘उनका मत सद्धर्म का मत है और उनका उद्देश्य पृथ्वी पर सद्धर्म के राज्य की
स्थापना करना है।’’
‘‘उनका मत सत्य है, सम्पूर्ण सत्य, और सत्य के अतिरिक्त कुछ नहीं है।’’
‘‘धन्य हैं, बुद्ध क्योंकि उनका मार्ग प्रज्ञा का मार्ग है और उनका पथ अन्धविश्वासों
से मुक्ति का पथ है। धन्य हैं, बुद्ध जो माध्यम-मार्ग की शिक्षा देते हैं। धन्य हैं,
बुद्ध जो सद्धर्म के धर्म की शिक्षा देते हैं। धन्य है, बुद्ध जो निब्बाण की शान्ति
की शिक्षा देते हैं। धन्य है, बुद्ध जो मुक्ति पाने निर्वाण के लिए अपने सह-प्राणियों
की सहायता करने के लिए मैत्री, करुणा और भ्रातृभाव का उपदेश देते हैं।’’