2. काश्यपों का धर्मांतरण - Page 152

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  1. जब यश के मित्रों को ज्ञात हुआ कि यश ने बुद्ध और उनके धम्म की शरण

ले ली है, तो उन्होंने सोचा कि जो यश के लिये अच्छा है, अवश्य ही उनके

लिये भी अच्छा होगा।

  1. अतः वे यश के पास गए और उससे कहा कि वह उनकी ओर से बुद्ध से

निवेदन करे कि वे उन्हें अपने शिष्यों के रूप में स्वीकार कर लें।

  1. यश सहमत हो गया और वह भगवान बुद्ध के पास गया और कहाः ‘‘कृपया

तथागत! मेरे इन चार मित्रों को धर्म का उपदेश देकर कृतार्थ करें।’’ भगवान

सहमत हो गये और यश के मित्रों ने धर्म की शरण ली।

2. काश्यपों का धर्मांतरण

  1. वाराणसी में काश्यप परिवार नामक एक परिवार रहा करता था। परिवार में तीन पुत्र

थे। वे अत्यन्त उच्च शिक्षित थे और कठोर धार्मिक जीवन व्यतीत करते थे।

  1. कुछ समय पश्चात् ज्येष्ठ पुत्र ने संन्यास ग्रहण करने की सोची। तदनुसार उसने

अपना घर त्याग दिया, संन्यास ग्रहण किया और उरुवेल की दिशा में चला

गया, जहाँ उसने अपना आश्रम स्थापित किया।

  1. उसके दो छोटे भाइयों ने उसका अनुसरण किया और वे भी संन्यासी बन

गये।

  1. वे सभी अग्निहोत्री या अग्नि के उपासक थे। वे जटिल कहलाते थे, क्योंकि वे

लम्बी जटायें रखते थे।

  1. तीनों भाइयों में से एक काश्यप कहलाता था उरुवेल काश्यप, दूसरा नदी काश्यप

(नदी अर्थात् निरंजना का काश्यप), और गया काश्यप (गया गाँव का नाम)

के नाम से जाने जाते थे।

  1. इसमें से उरुवेल काश्यप पांच सौ जटिल थे नदी कश्यप के तीन सौ और गया

काश्यप के पास दो सौ जटिल थे।

  1. इनमें से उरुवेल काश्यप की ख्याति दूर-दराज तक फैली हुई थी। उसके विषय

में जाना जाता था कि उसने जीते जी मुक्ति प्राप्त कर ली है। दूर-दूर स्थानों

से लोग उसके आश्रम में आते थे जो फल्गु नदी के तट पर स्थित था।

  1. भगवान बुद्ध ने उरुवेल काश्यप के नाम और ख्याति के विषय में ज्ञात होने

पर, अपने धर्म का उपदेश उसको देने और यदि सम्भव हुआ तो उसको अपने

धर्म में धर्मान्तरित करने की सोची।