2. काश्यपों का धर्मांतरण - Page 155

126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. अपने गुरु का अनुसरण करते हुए, काश्यप के अनुयायियों ने ईमानदारी से

विनम्र क्रमशः सद्धर्म की शिक्षा ग्रहण की। इस प्रकार काश्यप और उसके सभी

अनुयायी पूर्णतया धर्मांतरित हो गये थे।

  1. तब, उरुवेल काश्यप ने अपनी सभी वस्तुओं और अपने सभी अग्निहोत्र करने

के बरतन उठाकर एक साथ नदी में फेंक दिये, जो धारा की सतह पर तैरते

हुए बह गये।

  1. जो नदी और गया के आगे की ओर रहते थे, वस्त्रों (और शेष सामानों) को

बेतरतीब बहते हुए देख कर बोले, ‘‘यह हमारे भाई का सामान है, क्यों उसने

उन्हें फेंक दिया है? कोई महान परिवर्तन हुआ है।’’ और वे अत्यंत दुःखी और

बेचैन हो गये थे। दोनों प्रत्येक पाँच सौ अनुयायियों सहित, अपने भाई को खोजने

के लिये नदी के ऊपर की ओर बढ़े।

  1. अपने भाई और उसके सभी अनुयायियों को अब श्रमणों के समान वस्त्र धारण

किये हुए देखकर उनके मन में अपरिचित विचार आये और उन्होंने कारण

जानने का प्रयास किया। उरुवेल काश्यप ने बुद्ध के धर्म में अपने धर्मांतरण की

कहानी उन्हें बतायी।

  1. ‘‘हमारे भाई ने इस प्रकार आत्मसमर्पण कर लिया है, हमें भी उसका अनुसरण

करना चाहिये।’’ उन्होंने कहा।

  1. उन्होंने अपनी इच्छायें अपने ज्येष्ठ भाई के समक्ष व्यक्त कीं। तब दोनों भाई,

उनके सभी अनुयायियों के समूह के साथ, एक अग्निहोत्र धर्म की तुलना स्वयं

अपने धर्म के साथ करने के उद्देश्य से भगवान के उपदेश को सुनने के लिये

उनके समक्ष लाये गये।

  1. दोनों भाइयों को अपने उपदेश में भगवान बुद्ध ने कहा, ‘‘जब तक भ्रमित

विचार होते हैं, अविद्या का काला धुआँ उत्पन्न होता है, जिस प्रकार लकड़ी

द्वारा लकड़ी रगड़े जाने पर अग्नि उत्पन्न होती है।’’

  1. ‘‘काम, क्रोध और भ्रान्ति ये अग्नि के समान हैं, और ये अन्य सभी वस्तुओं

को भस्म कर डालती हैं जो संसार में दुख और शोक का कारण बनती है।’’

  1. ‘‘यदि एक बार इस मार्ग को पा लिया जाये और काम, क्रोध एवं भ्रान्ति

समाप्त हो जायें, तब इसके साथ दृष्टि, ज्ञान और पवित्र आचरण का जन्म होता

हैं।’’

  1. ‘‘अतः जब व्यक्ति को अकुशल कर्मों के प्रति घृणा उत्पन्न हो जाती है, तो