7. जीवक का धर्मांतरण - Page 167

138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘चित्त को ऊँचा उठाओ, और दृढ़ उद्देश्य द्वारा वास्तविक श्रद्धा को प्राप्त करो,

राजकीय आचरण के नियमों का उल्लंघन न करो, और अपनी प्रसन्नता को

बाह्य वस्तुओं पर नहीं, बल्कि स्वयं अपने चित्त पर आधारित होने दो। इस

प्रकार तुम अपना यश दूरस्थ कालों तक ले जाओगे।’’

  1. राजा ने ध्यान और आदर के साथ तथागत के सभी वचनों को सुना और उन्हें

हृदयंगम किया और उनका उपासक बनने का वचन दिया।

7. जीवक की धर्म-दीक्षा

  1. जीवक राजगृह की एक गणिका शालवती का पुत्र था।

  2. जन्म के तुरंत बाद बच्चा, अवैध होने के कारण, एक टोकरी में रखकर कूढ़े

के ढेर पर फेंक दिया गया था।

  1. बहुत बड़ी संख्या में लोग कूढ़े के ढेर के पास खड़े होकर बच्चे को देख रहे

थे। राजकुमार अभय उस स्थल से गुजर रहे थे। उन्होंने लोगों से पूछा, जिन्होंने

बताया, ‘‘यह जीवित है।’’

  1. इस कारण से बच्चे को जीवक कहा जाने लगा था। अभय ने उसे अपना लिया

और पाल-पोसकर बड़ा किया।

  1. जब जीवक बड़ा हुआ, तो उसे पता चला कि किस प्रकार वह बचाया गया

था और उसमें दूसरों को बचाने के लिए स्वयं को योग्य बनाने की उत्कृष्ट

अभिलाषा उत्पन्न हुई।

  1. अतः वह अभय की जानकारी और आज्ञा बिना सात वर्ष तक के लिये

चिकित्सा-शास्त्र पढ़ने के लिये तक्षशिला विश्वविद्यालय चला गया।

  1. राजगृह लौटने पर उसने एक चिकित्सक के रूप में अपना व्यवसाय स्थापित

किया और बहुत ही कम समय में व्यवसाय में अच्छा नाम और प्रसिद्धि प्राप्त

कर ली।

  1. उसका पहला रोगी साकेत के एक श्रेष्ठि की पत्नी थी और उसको अच्छा कर

देने के लिये उन्होंने सोलह हजार कार्षापण, एक पुरुष-नौकर एक स्त्री नौकर

तथा एक घोड़े सहित एक रथ पाया।

  1. जीवका योग्यता जान, अभय ने उन्हें अपने घर में निवास स्थान दे दिया।

  2. राजगृह में उन्होंने बिम्बिसार के एक कष्टदायी भगन्दर रोग का इलाज किया