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की माँग कर रहा है, मैं उसको नाशवान निधि नहीं दे सकता हूँ, जो अपने साथ

चिन्ता और दुख लायेगी, किन्तु मैं उसे एक पवित्र जीवन का उत्तराधिकार दे

सकता हूँ, जो एक ऐसी निधि है जो कभी नष्ट नहीं होगी।’’

  1. राहुल को गंभीरतापूर्वक सम्बोधित करते हुए तथागत ने कहा, ‘‘मेरे पास सोना,

चाँदी, हीरे-जवाहरात कुछ भी नहीं है। किन्तु यदि तुम आध्यात्मिक निधियाँ

प्राप्त करने के इच्छुक हो, और उन्हें वहन करने और सँभालने में समर्थ हो,

तो वे मेरे पास प्रचुर हैं। मेरी आध्यात्मिक निधि धर्मपरायणता का मार्ग है। क्या

तुम उनकी संगति चाहते हो जो अपना जीवन प्राप्त करने योग्य सर्वोच्च सुख

को प्राप्त करने के लिये अपने चित्त का संवर्धन करने के लिये समर्पित करते

हैं।’’

  1. और राहुल ने दृढ़तापूर्वक उत्तर दिया, ‘‘मैं चाहता हूँ।’’

  2. तब शुद्धोदन ने सुना कि राहुल भिक्षुओं की संगति में सम्मिलित हो गया है,

तो उन्हें अत्यन्त कष्ट हुआ।

3. शाक्यों द्वारा स्वागत

  1. शाक्यों के जनपद में अपनी वापसी पर तथागत ने पाया कि उनके जनपदवासी

दो समूहों में विभक्त हैं। एक उनके पक्ष में और दूसरा उनके विरुद्ध।

  1. इससे उन्हें उस पुराने मतभेद की याद आ गयी जो शाक्य-संघ में उस समय

पैदा हुआ था, जब शाक्यों और कोलियों के मध्य युद्ध का प्रश्न विचारधीन था

और जिसमें उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

  1. जो उस समय उनके विरुद्ध थे, उन्होंने आज भी उन्हें प्रणाम करने और उनकी

महानता को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। जो उनके पक्ष में थे उन्होंने

पहले ही प्रत्येक घर से एक पुत्र के उनके संघ में दीक्षित के लिए निश्चय कर

लिया था। उन लोगों ने अब संघ में दीक्षित तथागत के साथ-राजगृह को साथ

जाने का संकल्प कर लिया।

  1. जिन परिवारों ने एक पुत्र समर्पित करने का निश्चय किया था, उनमें से एक

परिवार अमितोदन का था।

  1. अमितोदन के दो पुत्र थे, एक अनुरुद्ध था, जो बहुत ही सुकोमलता से पाला-पोसा

गया था, और दूसरा महोनाम था।