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सकता है, जो माया का घर है, जहाँ चिन्ता, राग-द्वेष और क्लान्ति मिलती है,
और जहाँ दूसरों की सेवा के द्वारा सभी अधिकारों का उल्लंघन होता है।’’
- ‘‘सोने का महल मुझे जलता हुआ प्रतीत होता है, स्वादिष्ट खाद्य-पदार्थ विष
मिले प्रतीत होते हैं, और शांत कमल-शैय्या पर मगरमच्छ लोटते प्रतीत होते
हैं।’
6. मंत्री का उत्तर
- बुद्ध का उपदेश सुन कर, उसके सद्गुणों और ज्ञान के भली-भाँति अनुरूप जो
सभी तृष्णा-विमुक्त, तर्कपूर्ण कथनों से परिपूर्ण और प्रभावशाली था-मंत्री ने
इस प्रकार उत्तर दियाः
- ‘‘आपका संकल्प तो सर्वथा योग्य है, जो स्वयं में अयोग्य नहीं है, किन्तु केवल
वर्तमान समय में अयोग्य है। यह किसी भी प्रकार आपका कर्त्तव्य नहीं हो
सकता, कि आप अपने पिता को दुखी होने के लिये वृद्धावस्था में छोड़ कर
चल दो।’’
- ‘‘निश्चय ही आपकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण नहीं है, कम से कम वह धर्म-अर्थ
और काम को परखने में अनिपुण है, जबकि एक अनदेखे परिणाम के लिये
आप एक देखे हुए लक्ष्य का परित्याग करने के लिये तैयार हैं।’’
- ‘‘कुछ कहते हैं कि पुनर्जन्म है, दूसरे विश्वास के साथ कहते हैं कि नहीं हैं,
इसलिये इस विषय में इतना सन्देह है, तो फिर यह भी उचित है कि वर्तमान
भोगों को भोगा जाये।’’
- ‘‘यदि कोई परलोक होगा तो हम स्वयं ही इसका आनन्द उठायेंगे जब उसमें
पड़ेंगे, किन्तु यदि कोई परलोक नहीं होगा, तब सारा ही संसार निश्चित रूप
से अनायास मुक्त है, के निश्चित मुक्ति है।’’
- ‘‘कुछ कहते हैं कि पुनर्जन्म है, किन्तु वे मोक्ष की सम्भावना को नहीं स्वीकारते
हैं_ जिस प्रकार अग्नि स्वभाव से ऊष्ण है, जल तरल, उसी प्रकार वे मानते हैं
कि हमारे कार्य की शक्ति में एक विशेष स्वभाव है।’’
- ‘‘कुछ मानते हैं कि सभी वस्तुएँ अन्तर्निहित गुणों से उत्पन्न होती हैं, अच्छी
और बुरी दोनों तथा सत् और असत् दोनों, और क्योंकि यह सारा संसार इस
प्रकार स्वतः उत्पन्न होता है, इसलिये हमारे सभी प्रयास भी व्यर्थ हैं।’’