6. मंत्री का उत्तर - Page 189

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘क्योंकि इन्द्रियों के कार्य निश्चित हैं और उसी प्रकार ब्राह्य पदार्थों की

अनुकूलता या प्रतिकूलता भी, तब जो वृद्धावस्था और कष्टों से संयुक्त है, तो

उसे परिवर्तित करने का कौन सा प्रयास हितकर हो सकता हैं?’’ क्या ये सब

स्वतः नहीं उत्पन्न होते हैं?

  1. ‘‘अग्नि जल से शान्त हो जाती है, और अग्नि जल को भाप बना देती है और

विभिन्न तत्व, एक शरीर में एकत्रित हो, एकता उत्पन्न करते हैं और संसार का

भार वहन करते हैं।’’

  1. ‘‘गर्भ में भू्रण की प्रकृति है कि वह हाथ, पाँव, पेट, पीठ और सिर से जुड़ा

उत्पन्न होता है, और यह कि वह आत्मा से भी जुड़ा होता है, बुद्धिमान लोग

कहते हैं कि यह सब स्वतः उत्पन्न होता है।’’

  1. ‘‘काँटों के नुकीलेपन को कौन बनाता है? या जानवरों और पक्षियों के विभिन्न

स्वभाव को कौन निर्धारित करता है? यह सभी स्वतः उत्पन्न होता है ऐसा कोई

कार्य नहीं है, जो इच्छा से हो, तब कैसे चेतना जैसी एक वस्तु हो सकती

है?’’

  1. ‘‘दूसरे कहते हैं कि सृष्टि ईश्वर की रचना है, तो फिर किसी चेतन आत्मा का

प्रयास की क्या आवश्यकता हैं? जो संसार के कार्य का कारण है, वही उसके

कार्य करने को रोकने का कारण भी निश्चित करेगा।’’

  1. ‘‘कुछ कहते हैं कि अस्तित्व में आना और अस्तित्व का नष्ट होना आत्मा के

द्वारा एक समान किया जाता है, किन्तु वे कहते हैं कि अस्तित्व का आना बिना

किसी प्रयास के होता है, जबकि मोक्ष की प्राप्ति प्रयास से होती है।’’

  1. ‘‘एक मनुष्य अपने पूर्वजों के प्रति अपने ऋण से सन्तानोत्पत्ति द्वारा, शास्त्र

अध्ययन द्वारा ऋषि ऋण से, यज्ञों द्वारा देव-ऋण से मुक्त होता है, वह इन

तीनों ऋणों को लेकर जन्म लेता है, जो (इनसे) मुक्त हो गया है, वहीं वास्तव

में मोक्ष पा जाएगा।’’

  1. ‘‘अतः बुद्धिमान लोग उसी को मुक्ति का वचन देते हैं, जो नियमों की इस शृंखला

के अनुसार प्रयास करता है_ किन्तु जो अपनी सम्पूर्ण शक्ति के साथ प्रयास करने

को तैयार है, और मोक्ष का प्रयास करता है उसे मोक्ष प्राप्त जो जाएगा।’’

  1. ‘‘इसलिये, हे सौम्य युवक! यदि तुम्हें मोक्ष की चाह है तो ठीक से निर्धारित

नियम का पालन करो, इस प्रकार आपको स्वयं ही यह प्राप्त हो जाएगा और

राजा का दुख भी समाप्त हो जायेगा।’’