172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- किन्तु हवा और वर्षा के तूफान के कारण अग्नि नहीं जल पायी। अतः वे
सोपाक की माँ को चिता पर लिटा, छोड़ कर चले गये।
- सोपाक की माँ तब तक मरी नहीं थी। उसकी मृत्यु बाद में हुई। अपनी मृत्यु
से पहले उसने एक बच्चे को जन्म दिया था।
- उस बच्चे को श्मशान के रखवाले ने गोद ले लिया था और वह बच्चा उसके द्वारा
अपने बच्चे सुप्पिय के साथ पाल-पोस कर बड़ा किया गया। वह बच्चा सोपाक
समुदाय के नाम से जाना गया, जिस समुदाय से उसकी माँ सम्बन्धित थी। 5. एक दिन तथागत उस श्मशान के पास से गुजर रहे थे। भगवान को देख सोपाक
उनके समीप गया। भगवान को प्रणाम कर उसने उनके शिष्य के रूप में उनके
साथ जुड़ने की आज्ञा माँगी।
- तब सोपाक केवल सात वर्ष का था। अतः भगवान ने उससे अपने पिता की
अनुमति प्राप्त करने के लिये कहा।
- सोपाक गया और अपने पिता को ले आया। पिता ने भगवान को प्रणाम किया
और उसने अपने पुत्र को संघ में प्रविष्ट करने की प्रार्थना की। 8. इस बात की परवाह न करते हुए कि वह चाण्डाल समुदाय से सम्बंधित है,
भगवान ने उसे संघ में प्रविष्ट कर लिया और उसे धर्म और विनय की शिक्षा
दी।
बाद में सोपाक एक थेर (स्थविर) हुआ।
सुप्पिय और सोपाक बचपन से ही एक साथ बड़े हुए थे, क्योंकि सोपाक
सुप्पिय के पिता द्वारा गोद लिया गया था और पाल-पोस कर बड़ा किया गया
था, सुप्पिय ने अपने साथी सोपाक से भगवान का धर्म और विनय सीख लिया,
सोपाक से निवेदन किया कि वह उसे संघ में प्रविष्ट कर ले, हालाँकि सोपाक
एक ऐसे समुदाय से सम्बन्धित था, जो उस समुदाय से वर्ण-व्यवस्था के अनुसार
नीचे था, जिससे सुप्पिय सम्बन्धित था।
- सोपाक तैयार हो गया और सुप्पिय, जो एक तिरस्कृत समुदाय से सम्बन्धित
था, जिसका पेशा श्मशान में रखवाले के कर्त्तव्यों का निष्पादन करना था, एक
भिक्षु बन गया।
4. सुमंगल तथा अन्य निम्न जाति वालों की धर्म-दीक्षा
- सुमंगल श्रावस्ती का एक किसान था। वह एक छोटी दरांती, हल और कुदाली
से खेतों में काम करके अपना जीविकोपार्जन किया करता था।