2. प्रकृति नामक चाण्डालिका की प्रव्रज्या - Page 209

180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. माँ ने उसके रोने का कारण पूछा। लड़की ने पूरी कहानी सुना दी और कहा,

‘‘यदि आप मेरा विवाह करना चाहती है, तो मैं केवल आनन्द के साथ विवाह

कर सकती हूँ। मैं किसी और के साथ विवाह नहीं करूँगी।’’ 9. माँ पूछ-ताछ के लिये गयी। लौटने पर उसने लड़की को बताया कि ‘‘ऐसा

विवाह असम्भव है क्योंकि आनन्द ने ब्राह्मचर्य-व्रत ग्रहण कर रखा है।’’ 10. यह समाचार सुनने के बाद लड़की अत्यन्त दुखी हुई थी और उसने खाना-पीना

त्याग दिया। वह वस्तुस्थिति को स्वीकार करने को तैयार न थी, जबकि यही

भाग्य का लेखा था। अतः वह बोली, ‘‘माँ! तुम जादू-टोना जानती हो, क्या?

तुम क्यों नहीं हमारे उद्देश्य की पूर्ति के लिये इसका उपयोग करती हो?’’ माँ

ने कहा, ‘‘मैं देखूँगी कि क्या किया जा सकता है।’’

  1. मातंगी ने आनन्द को भोजन के लिये अपने घर आमन्त्रित किया। लड़की अत्यन्त

प्रसन्न हुई। मातंगी ने तब आनन्द को बताया कि उसकी लड़की उनसे विवाह

करने के लिए अत्यन्त व्याकुल थी। आनन्द ने उत्तर दिया, ‘‘मैंने ब्रह्मचर्य व्रत

ग्रहण किया है और इसलिये मैं किसी स्त्री से विवाह नहीं कर सकता हूँ।’’ 12. मातंगी ने कहा, ‘‘यदि आप मेरी पुत्री से विवाह नहीं करेंगे, तो वह आत्महत्या

कर लेगी, वह आप पर इतनी आसक्त है,’’ किन्तु आनन्द का उत्तर था, ‘किन्तु

मैं सहायता नहीं कर सकता हूँ’।

  1. मांतगी घर भीतर गयी और अपनी पुत्री को बताया कि आनन्द ने उससे विवाह

से इन्कार कर दिया है।

  1. लड़की चिल्लाई, ‘‘माँ! तुम्हारा जादू-टोना कहाँ है?’’ माँ ने कहा-‘‘मेरा जादू-टोना

तथागत के विरुद्ध विजयी नहीं हो सकता।’’

  1. लड़की चीखी और कहा, ‘‘मां! दरवाजा बन्द कर दो और उन्हें बाहर मत जाने

दो। मैं देखूँगी कि वे इसी रात मेरे पति बनते हैं।’’

  1. माँ ने वैसा ही किया जैसा लड़की उससे कराना चाहती थी। रात घिर आने पर

माँ ने कमरे में एक बिस्तर लगा दिया। लड़की अपने अच्छे रूप में अलंकृत

हो अन्दर आई, किन्तु आनन्द पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। 17. माँ ने अंत में अपने जादू-टोने का प्रयोग किया। जिसके परिणाम-स्वरूप कमरे

में आग जल उठी। माँ ने तब आनन्द को उनके कपड़ों से पकड़ा और बोली,

‘‘यदि आप मेरी पुत्री से विवाह करने को तैयार नहीं होंगे, तो मैं आपको इस

आग में झोंक दूँगी।’’ तथापि, आनन्द नहीं झुके और माँ तथा पुत्री ने निस्सहाय

अनुभव करके, उन्हें स्वतन्त्र कर दिया।