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आनन्द ने लौट कर तथागत को यह सब बताया, जो उसके साथ हुआ था।
दूसरे दिन लड़की आनन्द की खोज में जेतवन आयी। आनन्द भिक्षाटन के लिये
बाहर जा रहे थे। आनन्द ने उसे देखा और अनदेखा करना चाहा, किन्तु लड़की
ने उनका पीछा किया जहाँ कहीं भी वे गये।
- जब आनन्द जेतवन में लौटे, तो उन्होंने पाया कि लड़की उनके विहार के द्वार
पर प्रतीक्षा कर रही है।
- आनन्द ने तथागत को बताया, कैसे लड़की उनका पीछा कर रही थी। तथागत
ने उसे बुलवा भेजा।
- जब लड़की उनके सम्मुख पहुंची, तो तथागत ने उससे पूछा, ‘‘क्यों वह आनन्द
का पीछा कर रही थी? लड़की ने उत्तर दिया कि वह उनसे विवाह करने को
दृढ़संकल्प है। ‘‘मैंने सुना है यह अविवाहित हैं और मैं भी अविवाहित हूँ।’’
- भगवान् बोले, ‘‘आनन्द एक भिक्खु है, उनके सिर पर कोई बाल नहीं हैं। यदि
तुम भी उसी तरह अपना सिर मुँडवा सकती हो, तो मैं देखूँगा कि क्या किया
जा सकता है।’’
- लड़की ने उत्तर दिया, ‘‘मैं इसके लिए तैयार हूँ।’’ भगवन् ने कहा, ‘‘सिर मुँडवाने
से पहले तुम्हें अवश्य ही अपनी माँ से इसके लिये अनुमति लेनी होगी।’’
- लड़की अपनी माँ के पास लौटी और कहा, ‘‘माँ! मैंने वह प्राप्त कर लिया
है, जिसको प्राप्त करने में तुम असफल रही। भगवान् ने आनन्द से मेरा विवाह
कराने का वचन दिया है, यदि मैं अपना सिर मुँडवा लूँ।’’
- माँ क्रोधित हो गयी और कहा, ‘‘तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिये। तुम मेरी पुत्री
हो और तुम्हें बाल अवश्य रखने चाहिए। तुम आनन्द जैसे श्रमण से विवाह
करने को क्यों इतनी इच्छुक हो। मैं तुम्हारा विवाह एक बेहतर व्यक्ति से करवा
दूँगी।’’
- उसने उत्तर दिया, ‘‘या तो मैं मर जाऊँगी या आनन्द से विवाह करूँगी, मेरे
लिये कोई तीसरा विकल्प नहीं है।’’
- माँ ने कहा, ‘‘तुम! क्यों मुझे अपमानित कर रही हो?’’ लड़की ने कहा, ‘‘यदि
आप मुझसे प्रेम करती हैं, तो अवश्य ही मुझे वैसा करने दें, जैसा मैं चाहती
हूँ।’’
- माँ ने अपना विरोध वापस ले लिया और लड़की ने अपना सिर मुँडवा लिया।