3. अन्य अपराधियों की धर्म-दीक्षा - Page 217

188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. एक दिन जब, उचित तरीके से चीवर धारण कर और हाथ में पात्र लेकर,

अंगुलिमाल भिक्षा के लिये श्रीवस्ती में गया, उसे एक मनुष्य ने ढेला फेंक

कर मारा, एक दूसरे आदमी ने डण्डा फेंक कर मारा और एक तीसरे व्यक्ति

ने एक ठीकरा फेंक कर मारा, इस प्रकार खून बहते हुए एक फूटा सिर लिये

हुए, अपना टूटा पात्र लिये और अपने तार-तार हुआ चीवर लिये, वह तथागत

के सम्मुख उपस्थित हुआ। उसे समीप आते हुए देख तथागत ने अंगुलिमाल से

कहा, ‘‘यह सब सहन करो, यह सब सहन करो।’’

  1. इस प्रकार डाकू अंगुलिमाल बुद्ध की शिक्षाओं को स्वीकार करके एक धर्मपरायण

मनुष्य बन गया।

  1. मुक्ति-सुख का आनन्द लेते हुए उसने कहा, ‘‘वह जो धमोत्साह दर्शाता है,

जहाँ धर्मोत्साह बिल्कुल नहीं था, वह जो पुण्य के द्वारा अपने भूतकाल को

ढंक देता है, वह जो युवावस्था में बुद्ध से जुड़ जाता है, वह चन्द्रमा के समान,

पृथ्वी को प्रकाशमान कर देता है।’’

  1. ‘‘मेरे शत्रु इस सीख को सुनें, इस मत को अपनायें और प्रज्ञा के पुत्रों का

अनुसरण करें, जो इससे जुड़े हैं। मेरे शत्रु समय रहते सुनें, मैत्री का सन्देश जो

विनम्र सहिष्णुता है और अपने जीवन को इसके अनुसार व्यतीत करें।’’ 32. ‘‘अंगुलिमाल के रूप में, मैं पतनोन्मुख था, मेरी अधोगति थी, मैं धारा में नीचे की

ओर बहा जा रहा था। तथागत ने मुझे उस स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया है मैं जी

और चक्कर खाकर रह रहा था, जब तक वे मुझे भूमि पर नहीं लाये। ‘अंगुलिमाल’

के रूप में, मैं खून से भीगा हुआ था, अब में बचा लिया गया हूँ।’’

3. अन्य अपराधियों की धर्म-दीक्षा

  1. राजगृह के दक्षिण की ओर एक विशाल पर्वत था, जो नगर से लगभग दो सौ

ली (पचहत्तर मील) की दूरी पर था।

  1. इस पर्वत के मध्य एक दर्रा था, गहरा और सुनसान, जिसके मध्य से होकर

दक्षिण भारत की सड़क गुजरती थी।

  1. पाँच सौ डाकुओं ने इन संकीर्ण दर्रे में अपना निवास बना रखा था, जो उन सभी

यात्रियों की हत्या करते थे और उन्हें लूट लेते थे, जो उस रास्ते से गुजरते थे। 4. राजा ने उन्हें पकड़ने के लिये अपनी सेनाएं भेजी थी, किन्तु वे सदैव बच

निकलते थे।

  1. बुद्ध, पड़ोस में ही निवास करते थे और इन मनुष्यों की स्थिति पर विचार

करके, जो अपने आचरण को नहीं समझते हैं, और यद्यपि वे इस लोक में

उन्हें शिक्षित करने के लिये आये हैं, फिर भी उनका आँखों से अब तक नहीं