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अध्याय-चार

भाग- I

  1. धर्म क्या है? 287
  2. धम्म धर्म से कैसे भिन्न है? 288
  3. धर्म का उद्देश्य और धम्म का उद्देश्य 290
  4. नैतिकता और धर्म 294
  5. धम्म और नैतिकता 295
  6. केवल नैतिकता ही पर्याप्त नहीं है। उसे पवित्र और व्यापक  296

भी होना चाहिए।

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भाग- II

किस प्रकार शाब्दिक समानता तात्विक भेद को छिपाये रखती है

  1. प्रारम्भिक 301
  2. पूनर्जन्म किस (चीज) का? 302
  3. पुनर्जन्म किस (व्यक्ति) का? 305

विभाग - दो, कर्म

  1. क्या बौद्धों का ‘कर्म-सिद्धांत’ ब्राह्मणवादी-सिद्धांत के समान ही है? 309
  2. क्या भगवान बुद्ध यह मानते थे कि अतीत कर्म भावी जीवन को  310

प्रभावित करते हैं?

  1. क्या भगवान बुद्ध यह मानते थे कि अतीत कर्म भावी जीवन को  314

प्रभावित करते हैं? विभाग -तीन, अहिंसा

  1. अहिंसा के भिन्न-भिन्न अर्थ और व्यवहार 317
  2. ‘अहिंसा’ का वास्तविक अर्थ 318 विभाग -चार, संसरण

(आत्मा का एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश करना) 320

विभाग - पांच,

भ्रम के कारण 322

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भाग- III

  1. शुभ-कर्म, अशुभ-कर्म और पाप 325