194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- जैसा कि ज्ञात है, भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के पश्चात् अविलम्ब ही
राजगृह में प्रथम बौद्ध संगीति हुई थी।
- महाकाश्यप ने संगीति की अध्यक्षता की थी। कपिलवस्तु के आनन्द, उपालि और
अन्य भिक्षु उनके साथ-साथ, जहाँ कहीं भी वे प्रायः गये, वे उनकी मृत्युपर्यन्त
उनके साथ रहे थे।
लेकिन अध्यक्ष महाकाश्यप ने क्या किया?
उन्होंने आनन्द से ‘धम्म’ का संगायन करने का निवेदन किया और संगीति के
समक्ष प्रश्न रखा, ‘‘क्या यह सही है?’’ उन्होंने सकारात्मक उत्तर दिया। और
महाकाश्यप ने तब प्रश्न को समाप्त कर दिया।
- इसके पश्चात् उन्होंने उपालि से ‘विनय’ का संगायन करने का निवेदन किया
और संगीति के समक्ष प्रश्न रखा, ‘‘क्या यह सही है?’’ उन्होंने सकारात्मक
उत्तर दिया। महाकाश्यप ने तब प्रश्न को समाप्त कर दिया।
- उस समय महाकाश्यप को चाहिये था कि वह संगीति में उपस्थित किसी अन्य
के समक्ष भगवान बुद्ध के जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं का विवरण देने
का तीसरा प्रश्न रखते।
- किन्तु महाकाश्यप ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने सोचा कि ‘धम्म’ और ‘विनय’
केवल यही दो विषय ऐसे हैं, जिनसे संघ का सरोकार है।
- यदि महाकाश्यप ने भगवान बुद्ध के जीवन का विवरण संग्रहित करा लिया होता
तो हमारे पास आज भगवान बुद्ध का सम्पूर्ण जीवन-वृतान्त होता।
- भगवान बुद्ध के जीवन के विषय में विवरण संग्रहित करने की बात महाकाश्यप
को क्यों नहीं सूझी?
- इसका कारण उपेक्षा-भाव नहीं हो सकता। इसका एकमात्र जो उत्तर दिया जा
सकता है वह है कि भगवान बुद्ध ने अपने-अपने धर्म-शासन में स्वयं के लिये
कोई भी स्थान नहीं बनाया था।
- भगवान बुद्ध और उनका धम्म सर्वथा पृथक-पृथक थे। उनका अपना स्थान था
और धर्म का अपना।
- भगवान बुद्ध द्वारा स्वयं को अपने धम्म से बाहर रखने का एक और उदाहरण
अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करने की उनकी अस्वीकृति में पाया जा सकता
है।