1. जीवन की पवित्रता बनाये रखना धम्म है - Page 237

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. जब साधना की पाँच बाधा और उनके स्रोत दूर कर दिये जाते हैं, तो चार

स्मृति-उपस्थानों की उत्पत्ति होनी चाहिये।

(iv)

  1. ये तीन घात (असफलतायें) हैं, शील-घात, चित्त-घात और दृष्टि-घात।
  2. शील-घात किस प्रकार का है? एक मनुष्य जीव-हिंसा करता है, चोरी करता

है, काम-भोग संबन्धी मिथ्याचार करता है, झूठ बोलता है, चुगली खाता है,

कठोर बोलता है और व्यर्थ व निरर्थक बोलता है। यह ‘‘शील-घात’’ कहलाता

है।

  1. चित्त-घात किसे कहते हैं?

  2. एक मनुष्य लोभी और ईष्यालु होता है। यह ‘चित्त-घात’ कहलाता है।

  3. और दृष्टि-घात किसे कहते हैं?

  4. इसमें एक मनुष्य भ्रष्ट, मिथ्या-दृष्टि रखता है कि दान देने में, त्याग करने में

और बलिदान देने में कोई पुण्य नहीं है_ कि शुभ और अशुभ कार्यों का कोई

फल नहीं हैं_ यह लोक नहीं है, न कोई परलोक है_ न कोई माता, न कोई

पिता, न कोई स्वोत्पन्न प्राणी ही है_ संसार में कोई ऐसे श्रमण और ब्राह्मण नहीं

हैं, जो शिखर तक पहुँचे हों जिन्होंने पूर्णता प्राप्त कर ली हो, जिन्होंने स्वयं

ही अपनी अभिज्ञा शक्तियों से परलोक का साक्षात्कार कर लिया हो, और जो

उसकी घोषणा कर सकता हो। भिक्षुओं! यह ‘‘दृष्टि-घात’’ कहलाता है। 7. ‘‘भिक्षुओ! यह शील-घात, चित्त-घात और दृष्टि-घात के कारण ही ऐसा होता

है कि प्राणी, जब मरणोपरांत शरीर बिखरने पर उजाड़ में, दुर्गति में, अधःपतन

में, शोधन-स्थान में पुनर्जन्म लेते हैं। इस प्रकार के तीन घात हैं। 8. भिक्षुओ! ये तीन लाभ (सफलतायें) हैं। कौन से तीन? शील-लाभ, चित्त-लाभ

तथा दृष्टि-लाभ।

  1. अब शील-लाभ किस प्रकार का है?

  2. एक मनुष्य जीवन-हिंसा से विरत रहता है, कटु वचन और निरर्थक बोलने से

विरत रहता है। यह ‘‘शील-लाभ’’ कहलाता है।

  1. चित्त-लाभ क्या होता है?

  2. इसमें एक मनुष्य लोभी और ईष्यालु नहीं है। यह ‘‘चित्त-लाभ’’ कहलाता है।

  3. और दृष्टि-लाभ किस प्रकार का है?