3. निर्वाण प्राप्त करना धम्म है - Page 243

214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. वे मानते हैं कि निर्वाण का अर्थ सभी मानवीय-प्रवृत्तियों का बुझ जाना, अर्थात्

मृत्यु होता है।

  1. इस अर्थ के द्वारा उन्होंने निर्वाण के सिद्धान्त का मजाक उड़ाने की चेष्टा की

है।

  1. यदि कोई ‘अग्नि-स्कन्धोपम’ सूक्त की भाषा का परीक्षण करे, तो उसे यह

पूर्णतया स्पष्ट हो जाएगा कि ‘निर्वाण’ का ऐसा अर्थ कदापि नहीं है।

  1. इस प्रवचन में यह नहीं कहा गया है कि जीवन जल रहा है और बुझ जाना

मृत्यु है। इसमें यह कहा गया है कि राग-द्वेष-मोह जल रहे हैं।

  1. इस अग्नि स्कन्धोपम सूक्त में यह नहीं कहा गया है कि राग-द्वेषों (मनुष्य

की प्रवृत्तियों) को पूर्णतया बुझा देना चाहिये। उनका कहना है कि ऐसा करके

अग्नि में घी न डालें।

  1. दूसरी बात यह है कि आलोचक निर्वाण और परिनिर्वाण में अन्तर करने में

असफल रहे हैं।

  1. जैसे कि उदान में कहा गया है, ‘‘जब परिनिर्वाण घटित होता है, तब शरीर

विघटित हो जाता है, सभी प्रत्यक्ष ज्ञान रुक जाते हैं, सभी देवनाओं का नाश

हो जाता है, गतिविधियाँ बन्द हो जाती हैं तथा चेतना समाप्त हो जाती है। इस

प्रकार परिनिर्वाण का अर्थ है पूर्णतया बुझ जाना।’’

  1. निर्वाण का कभी यह अर्थ नहीं हो सकता है। निर्वाण का अर्थ है अपनी प्रवृत्तियों

पर पर्याप्त नियन्त्रण रखना, जिससे कि सद्धर्म के मार्ग पर चलने के योग्य बना

जा सके। इससे अधिक इसका कोई अर्थ अभीष्ट नहीं।

  1. भगवान बुद्ध द्वारा स्वयं राध को स्पष्ट किया गया है कि निर्वाण सदाचरण

जीवन का ही दूसरा नाम है।

  1. एक बार भदन्त राध तथागत के पास आये। उन्होंने तथागत को प्रणाम किया

और एक और बैठ गये। इस प्रकार बैठे हुए, भदन्त राध ने निर्वाण तथागत को

सम्बोधित किया, ‘‘विनती करता हूँ तथागत, निर्वाण किस लिये है?’’ 52. तथागत ने उत्तर दिया ‘‘निर्वाण का अर्थ है रागाग्नि, द्वेषाग्नि तथा मोहाग्नि का

बुझ जाना अर्थात् प्रवृत्तियों से मुक्ति।’’

  1. ‘‘किन्तु भन्ते! निर्वाण का उद्देश्य क्या हैं?’’

  2. ‘‘राधा निर्दोष जीवन का मूल निर्वाण में है, निर्वाण इसका लक्ष्य है। निर्वाण ही

इसका अन्त है।