224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
1. परा-प्रकृति में विश्वास अ-धम्म है।
- जब कभी कोई घटना घटती है, तो मनुष्य सदैव यह जानना चाहता है कि यह
कैसे हुआ? इसका क्या कारण है?
- कभी-कभी कारण और उससे फलित होने वाला कार्य इतने समीप होते हैं कि
घटना के घटित होने के कारण का पता लगाना कठिन नहीं होता। 3. लेकिन कभी-कभी कारण से कार्य इतना अधिक दूर होता है कि कार्य के
कारण का पता लगाना कठिन हो जाता है। ऊपरी तौर पर इसके लिये कोई
कारण दिखायी नहीं देता।
तब प्रश्न उठता है कि यह घटना कैसे घटी?
इसका सबसे सरल और सीधा-सादा उत्तर है कि घटना का घटित होना किसी
अलौकिक कारण के परिणामस्वरूप है, जिसे प्रायः करिश्मा और चमत्कार
(प्रातिहार्य) कहा जाता है।
- भगवान बुद्ध के पूर्ववर्तियों ने इस प्रश्न के उत्तर भिन्न-भिन्न दिये हैं।
- पकुध कत्यान ने इस बात को अस्वीकार किया था कि प्रत्येक घटना का कोई
कारण होता है। उन्होंने कहा था कि घटनायें बिना किसी कारण के स्वतंत्र रूप
से घटित होती हैं।
- मक्खली गोशाल ने स्वीकार किया था कि हर घटना का अवश्य कोई कारण
होना चाहिये। किन्तु उसका कहना था कि कारण मानव की शक्ति में नहीं
पाया जा सकता, बल्कि इसे प्रकृति, अनिवार्यता, वस्तुओं के अन्तर्निहित नियमों,
भाग्य इत्यादि में ही खोजा जाना चाहिये।
- भगवान बुद्ध ने इन सिद्धान्तों का खण्डन किया। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि
न केवल प्रत्येक घटना का कोई न कोई कारण होता है, बल्कि कारण किसी
न किसी मानवीय क्रिया या प्राकृतिक नियम का परिणाम होता है। 10. समय (काल), प्रकृति, अनिवार्यता, इत्यादि के सिद्धान्त को किसी घटना के
घटित होने के कारण के खिलाफ ही उनका विरोध था।
- यदि काल (समय), प्रकृति, अनिवार्यता, इत्यादि ही किसी घटना के घटित होने
के एकमात्र कारण हैं, तो हमारी स्थिति क्या रह जाती है?
- तो क्या मनुष्य काल (समय), प्रकृति, संयोग, ईश्वर, भाग्य, अनिवार्यता के
हाथों की एक कठिपुतली मात्र है?