2. ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास अ-ध्म्म है। - Page 254

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  1. यदि मनुष्य स्वतंत्र नहीं है, तो मनुष्य के अस्तित्व का क्या प्रयोजन है? यदि वह

अलौकिक कारणों में विश्वास रखता है तो मनुष्य की बुद्धि का क्या उपयोग है? 14. यदि मनुष्य स्वतंत्र है, तो प्रत्येक घटना का या तो मानवी कारण या प्राकृतिक

कारण अवश्य ही होना चाहिये। ऐसी कोई भी घटना हो ही नहीं सकती, जिसका

कारण अलौकिक हो।

  1. यह सम्भव हो सकता है कि मनुष्य किसी घटना के घटित होने के वास्तविक

कारण को खोज पाने में समर्थ न हो सके, किन्तु यदि वह बुद्धिमान है तो वह

एक न एक दिन इसको खोज लेगा।

  1. परा-प्राकृतिकवाद का खण्डन करने में भगवान बुद्ध के तीन उद्देश्य थे।
  2. उनका पहला उद्देश्य मनुष्य को बुद्धिवादी मार्ग की ओर ले जाना था।
  3. उनका दूसरा उद्देश्य सत्य की खोज करने के लिये मनुष्य को स्वतंत्र करना

था।

  1. उनका तीसरा उद्देश्य अन्धविश्वासों के सबसे प्रबल स्रोत को काट देना था,

जिसके कारण मनुष्य की खोज करने की प्रवृत्ति की हत्या होती है। 20. इसी को बौद्ध धर्म का हेतुवाद या कारण-कार्य सम्बन्ध का नियम कहा जाता

है।

  1. यह हेतुवाद कारण कार्य-सम्बन्ध का सिद्धान्त बौद्ध धम्म का सबसे प्रमुख

सिद्धान्त है। यह धम्म बुद्धिवाद का उपदेश होता है और यदि बुद्धिवाद नहीं,

तो बौद्ध धम्म कुछ नहीं है।

  1. यही कारण है कि पराप्रकृति (अलौकिक) की पूजा अधम्म है।

2. ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास अधम्म है।

  1. इस संसार की रचना किसने की? यह एक सामान्य प्रश्न है। संसार की रचना

ईश्वर द्वारा की गई यह अत्यन्त सामान्य उत्तर है।

  1. ब्राह्मण-योजना में यह ईश्वर विभिन्न नामों से जाना जाता है, प्रजापति, ईश्वर,

ब्रह्म या महाब्रह्मा।

  1. अब प्रश्न किया जाए कि यह ईश्वर कौन है? और यह कैसे अस्तित्व में आया?

तो इसका कोई उत्तर नहीं है।