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- उन दोनों के मध्य एक विवाद उठ खड़ा हुआ था कि मुक्ति का सच्चा मार्ग
कौन-सा है और झूठा कौन सा?
- लगभग उसी समय एक विशाल भिक्षु-संघ के साथ बुद्ध कोशल जनपद में
यात्रा कर रहे थे। वे मनसाकत नामक ब्राह्मण-गांव में और अचिरवती नदी के
तट पर आम्र-वन में ठहरे थे।
- मनसाकत का कस्बा था, जिसमें वासेट्ठ और भारद्वाज रहते थे। यह सुनकर कि
तथागत उनके कस्बे में ठहरे हुए हैं, वे उनके पास गये और प्रत्येक ने अपना
पक्ष प्रस्तुत किया।
- भारद्वाज ने कहा, ‘‘तरुक्ख का मार्ग सीधा मार्ग है। यह सीधा मार्ग है, जो मुक्ति
की ओर जाता है और जो इसके अनुसार आचरण करता है, उसे वह सीधा
ब्रह्म की अवस्था में ले जाता है।
- वासेट्ठ ने कहा, ‘‘हे गौतम! अनेक ब्राह्मण अनेक मार्गों की शिक्षा देते हैं_
अध्वर्य्य ब्राह्मण, तैत्तिरिय ब्राह्मण, कन्छोक ब्राह्मण, भीहुवर्गीय ब्राह्मण! जो उनके
अनुसार आचरण करते हैं, उसे ब्रह्म की ओर ले जाते हैं।’’
- ‘‘जिस प्रकार किसी गांव या कस्बे के निकट अनेक और विभिन्न मार्ग होते हैं,
फिर भी वे सब एक साथ गांव में जाकर मिलते हैं, ठीक उसी तरह से अनेक
ब्राह्मणों द्वारा सिखाये गये सभी विभिन्न मार्ग ब्रह्म की ओर ले जाते हैं।’’
- भगवान बुद्ध ने पूछा, ‘‘वासेट्ठ क्या तुम यह कहते हो कि वे सभी मार्ग ठीक
है?ं ‘‘मैं ऐसा ही कहता हूँ, गौतम,’’ वसेट्ठ ने उत्तर दिया।
- ‘‘किन्तु वासेट्ठ! तीन वेदों के जानकार इन ब्राह्मणों में क्या कोई भी ऐसा है,
जिसने कभी आमने-सामने ब्रह्म के दर्शन किये हैं?’’
‘‘निस्सन्देह नहीं, गौतम।’’
‘‘तीन वेदों के जानकार इन ब्राह्मणों के गुरुओं में से क्या कोई भी ऐसा है,
जिसने आमने-सामने ब्रह्म के दर्शन किये हों?’’
‘‘निस्संदेह, नहीं, गौतम।’’
‘‘किसी ने भी ब्रह्म के दर्शन नहीं किये हैं। ब्रह्म के विषय में किसी को
अनुभूतिजन्य ज्ञान नहीं हैं। ‘‘हाँ ऐसा ही है’’ वासेट्ठ ने कहा। ‘‘तब तुम
कैसे विश्वास करते हो कि ब्राह्मणों का ब्रह्म विषयक दावा सत्य पर आधारित
है?’’