232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- बुद्ध ने तर्क प्रस्तुत किया कि किसी वस्तु की वास्तविकता स्वीकार करने के
लिये पहले उसका कोई न कोई प्रमाण अवश्य होना चाहिये। 13. प्रमाण दो प्रकार के हैं, प्रत्यक्ष और अनुमान।
- बुद्ध ने पूछा, ‘‘क्या किसी ने ब्रह्म का अनुभव किया है? क्या तुमने ब्रह्म को
देखा है? क्या तुमने ब्रह्म से बातचीत की है, क्या तुमने ब्रह्म को सूँघा है?’’ 15. वासेट्ठ ने कहा, ‘‘नहीं’’।
- ‘‘प्रमाण का दूसरा तरीका भी ब्रह्म के अस्तित्व को सिद्ध करने में अपर्याप्त
है।’’
- ‘‘किस चीज से ब्रह्म का अनुमान लगाया जा सकता है?’’ बुद्ध ने पूछा। पुनः
इसका भी कोई उत्तर नहीं था।
- कुछ अन्य लोग भी तर्क देते हैं कि एक अदृश्य वस्तु का भी अस्तित्व हो
सकता है। अतः वे कहते हैं कि ब्रह्म विद्यमान है, यद्यपि वह अदृश्य है। 19. इस खोखले कथन में यह एक असम्भव स्थिति है।
- किन्तु तर्क के लिये यह मान लिया जाये कि अदृश्य होने पर भी कोई वस्तु
विद्यमान हो सकती है।
- इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बिजली है। यह विद्यमान होती है, यद्यपि यह अदृश्य
है।
यह तर्क पर्याप्त नहीं है।
एक अदृश्य वस्तु को किसी अन्य दृश्य रूप में अपने को दर्शाना चाहिये केवल
तब ही यह वास्तविक कही जा सकती है।
- किन्तु यदि कोई अदृश्य वस्तु किसी दृश्य रूप में स्वयं को नहीं दर्शाती है, तब
उसकी वास्तविकता नहीं है।
- हम अदृश्य बिजली की वास्तविकता को उसके उपरान्त होने वाले परिणामों को
देखकर स्वीकार करते हैं।
- बिजली प्रकाश उत्पन्न करती है। प्रकाश से हम बिजली की वास्तविकता स्वीकार
करते है, यद्यपि यह अदृश्य है।
- यह अदृश्य ब्रह्म क्या उत्पन्न करता है? क्या यह कोई दृश्य परिणाम उत्पन्न
करता है?