1. मन के मैल को दूर कर उसे निर्मल बनाना। - Page 287

258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. इसके विपरीत दूसरे की दुष्प्रवृत्ति के दुष्ट प्रेतात्मा द्वारा तब तक पीते रहने को

प्रेरित किया गया, जब तक कि वह नशे और नींद द्वारा अभिभूत नहीं हो गया

और सराय के पास ही सड़क पर गिर गया।

  1. प्रातःकाल जब व्यापारियों की गाडि़यां उस स्थल को छोड़ रहीं थीं, तो गाड़ीवान

सड़क पर पड़े हुए उस मनुष्य को न देख सके, तब वह गाडि़यों के पहियों के

नीचे आकर मर गया।

  1. दूसरा व्यापारी एक दूर-दराज के देश में जा पहुंचा, वहां एक पवित्र घोड़े के

घुटने टेकने के परिणामस्वरूप उस देश के राजा का उत्तराधिकारी चुन लिया

गया और वह तदनुसार सिंहासन पर विराजमान हुआ।

  1. इसके पश्चात्, घटनाओं के विचित्र मोड़ पर विचार करके, वह अपने देश लौट

आया और भगवान बुद्ध को अपने यहां निमंत्रित किया, जिससे वे जनता को

उपदेश दे सकें।

  1. इस अवसर पर तथागत ने दुष्ट-हृदय व्यापारी की मृत्यु का कारण बताया

और दूसरे बुद्धिमान व्यापारी के ऐश्वर्यशाली बनने का भी कारण बताया और

कहाः

  1. ‘‘मन ही इन सब प्रवृत्तियों का मूल है, मन ही मालिक है, मन ही कारण

है।’’

  1. ‘‘यदि मन के भीतर दुष्प्रवृत्तियाँ हैं, तब उसके वचन भी दुष्ट होते हैं, कर्म भी

दुष्ट होते हैं, और दुष्कर्म का परिणाम दुख उस मनुष्य का उसी प्रकार अनुसरण

करते हैं, जैसे रथ के पहिये रथ खींचने वाले (बैलों) के पीछे-पीछे।’’

  1. ‘‘मन ही इन सब प्रवृत्तियों का मूल है, यह मन ही उन पर शासन करता है,

यह मन ही है, जो सफल होता है।’’

  1. ‘‘यदि मन में अच्छे विचार हैं, तो वचन भी अच्छे होते हैं और कर्म भी अच्छे

होते हैं और उनके आचरण का परिणाम सुख उस मनुष्य का उसी प्रकार

अनुसरण करते हैं, जैसे कभी साथ न छोड़ने वाली छाया है।’’

  1. इन शब्दों को सुन कर, राजा और उसके मन्त्रीगण, अन्य अनगिनत लोगों के

साथ धर्मान्तरित हो गये और तथागत के शिष्य बन गये।