262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- ‘‘यद्यपि अन्य लोग झूठ बोलें, चुगली खाएं कठोर बोलें, या व्यर्थ बकवास करें,
मैं नहीं करूंगा।’’
‘‘यद्यपि अन्य लोग लोभी हों, मैं लोभ नहीं करूंगा।’’
‘‘यद्यपि अन्य लोग द्वेष करें, मैं द्वेष नहीं करूंगा।’’
‘‘यद्यपि अन्य लोग मिथ्या दृष्टियों, मिथ्या संकल्पों, मिथ्या वचनों, मिथ्या कर्मान्तों
और मिथ्या समाधि को मानते हों, मैं अवश्य ही (आर्य आष्ट्रांगिक मार्ग का)
सम्यक, दृष्टि, सम्यक्, संकल्प, सम्यक् वचन, सम्यक् आजीविका, सम्यक्
व्यायाम, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि का पालन करूंगा।’’ 44. ‘‘यद्यपि अन्य लोग सत्य के विषय में गलती पर हों और मुक्ति के विषय में
गलती पर हों, तुम सत्य और मुक्ति के विषय में सही होऊँगा।’’ 45. ‘‘यद्यपि अन्य लोग आलस्य और तन्द्रा से ग्रसित हों, मैं अपने को उनसे मुक्त
रखूंगा।’’
- ‘‘यद्यपि कुछ लोग उद्धत स्वभाव के हों, मैं विनम्र स्वभाव का रहूँगा।’’
- ‘‘यद्यपि अन्य लोग शंकाओं से व्याकुल हों, मैं उनसे मुक्त रहूँगा।’’
- ‘‘यद्यपि अन्य लोग क्रोध, द्वेष, ईर्ष्या, चिन्ता, कंजूसी, लोभ, ढोंग, ठगी, वाधक,
दुस्साहस, कुसंगति, असावधानी, अविश्वास, निर्लज्जता, अनैतिकता, अशिक्षा,
सुस्ती, घबराहट और मूर्खता को मन में रखते हैं, मैं इन सब बातों के विपरीत
रहूँगा।’’
- ‘‘यद्यपि अन्य लोग लौकिक वस्तुओं से चिपटे रहें और उनसे अपना नियंत्रण
ढीला न करें, मैं ऐसा नहीं करूंगा।’’
- ‘‘चुन्द! वाणी और कर्म का तो कहना ही क्या, विज्ञान भी चेतना से प्रभावित
होता है और इसलिये मैं कहता हूं चुन्द! इन सभी संकल्पों के सम्बन्ध में जो
मैंने बताये हैं, दृढ़-निश्चयी होना चाहिये।’’
- इस प्रकार भगवान बुद्ध द्वारा बताया गया धम्म का यही उद्देश्य है।