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- ‘‘शील आरम्भ और शरण-स्थान है, शील समस्त कल्याण की जननी है। यह
समस्त अच्छी अवस्थाओं में प्रमुख है। इसलिये अपने शील को शुद्ध करो।’’
2. धम्म केवल सद्धम्म है, जब वह यह शिक्षा देता है कि प्रज्ञा और शील के साथ-साथ करुणा का भी होना अनिवार्य है
- बुद्ध के धम्म की आधार-शिला के प्रश्न पर दृष्टिकोणों में कुछ भेद रहे हैं।
- क्या मात्र प्रज्ञा उनके धम्म की आधार-शिला है? क्या मात्र करुणा उनके धम्म
की आधार-शिला है?
- इस विवाद ने भगवान बुद्ध के अनुयायियों को दो पक्षों में विभाजित कर दिया था।
एक वर्ग की मान्यता थी कि केवल प्रज्ञा ही बुद्ध के धम्म की आधार-शिला है।
दूसरे वर्ग की मान्यता थी कि केवल करुणा ही बुद्ध के धम्म की आधार-शिला
है।
ये दोनों वर्ग अभी भी विभाजित हैं।
दोनों ही वर्ग गलत प्रतीत होते हैं, यदि उन्हें स्वयं बुद्ध के वचनों के प्रकाश में
समझा जाये।
- इसमें कोई मतभेद नहीं है कि प्रज्ञा बुद्ध के धम्म के दो स्तम्भों में से एक
है।
- विवाद यह है कि क्या करुणा भी उनके धम्म का एक स्तम्भ है?
- करुणा उनके धम्म का एक स्तम्भ है, यह विवाद से परे है।
- इसके समर्थन में स्वयं उनके वचन उद्घृत किये जा सकते हैं।
- प्राचीन काल में गान्धार नामक देश में एक बहुत घृणित रोग से पीडि़त कोई
वृद्ध भिक्षु था, वह जिस स्थान पर बैठता, उसी जगह को प्रदूषित करता था। 11. वह एक ऐसे विहार में रहता था, जहाँ कोई भी उसके समीप नहीं जाता था
या उसकी सहायता नहीं करता था।
- भगवान बुद्ध अपने 500 अनुयायियों के साथ यहाँ आये, और सभी प्रकार के
आवश्यक बर्तन तथा गर्म पानी लेकर वे एक साथ उस स्थान पर पहुंचे, जहाँ
वृद्ध भिक्षु लेटा था।
- उस स्थान की दुर्गन्ध इतनी बुरी थी कि सभी भिक्षुओं को उस मनुष्य के प्रति
घृणा हो गयी, किन्तु विश्व-पूजनीय तथागत ने शुक्र-देव को गर्म पानी ले आने