1. धम्म तभी सद्धम्म है जब वह मनुष्य-मनुष्य के बीच अवरोधों (दीवारों) को मिटा दें। - Page 306

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असमानता ऐतिहासिक विकास का परिणाम नहीं है। असमानता ब्राह्मणवाद का

शास्त्र सम्मत सिद्धांत है।

  1. भगवान बुद्ध ने इसका जड़-मूल से विरोध किया था।

  2. भगवान बुद्ध जातिवाद के प्रबलतम विरोधी और समानता के सबसे पहले व

बड़े समर्थक थे।

  1. जातिवाद और असमानता के पक्ष में ऐसा कोई भी तर्क नहीं है, जिसका उन्होंने

खण्डन नहीं किया।

  1. ऐसे अनेक ब्राह्मण थे, जिन्होंने इस विषय पर बुद्ध को चुनौती दी थी। किन्तु

तथागत ने उन्हें पूर्णतया मौन कर दिया था।

  1. अश्वलायन-सुत्त में कथा कही गयी है कि एक बार सब ब्राह्मणों ने इकट्ठे

होकर अश्वलायन को भगवान बुद्ध के पास जाने और जातिवाद व असमानता

के विरुद्ध उनके मतों का खण्डन करने के लिये राजी कर लिया था। 16. अश्वलायन भगवान बुद्ध के पास गया और उनके समक्ष ब्राह्मणों की श्रेष्ठता

के पक्ष में अपना मत प्रस्तुत किया।

  1. उसने कहा, ‘‘श्रमण गौतम! ब्राह्मण दावा करते हैं कि केवल ब्राह्मण ही श्रेष्ठ

वर्ग के हैं, अन्य सभी वर्ग उनसे निम्न हैं, केवल ब्राह्मण ही शुक्ल वर्ण में

उत्पन्न हैं, अन्य सभी वर्ग कृष्ण-वर्ण के हैं पवित्रता केवल ब्राह्मणों में वास

करती है और अब्राह्मणों में नहीं और केवल ब्राह्मण ब्रह्मा के औरस पुत्र हैं,

उसके मुँह से जन्मे, उसकी सन्तानें, और उसके उत्तराधिकारी हैं। इस पर गौतम

क्या कहते हैं?’’

  1. भगवान बुद्ध के उत्तर ने अश्वलायन को बिल्कुल हतप्रद कर दिया।
  2. भगवान बुद्ध ने कहा, ‘‘अश्वलायन, क्या ब्राह्मणों की ब्राह्मण पत्नियों को उनका

मासिक धर्म नहीं होता, और गर्भ धारण नहीं करती, और लेटती नहीं तथा

सन्तान का प्रसव नहीं करती? यह सब होते हुए भी क्या ब्राह्मण वास्तव में उन

सबका दावा करते हैं, जो तुमने कहा है, जबकि वे स्वयं स्त्रियों से अन्य सभी

लोगों के समान जन्मे हैं? फिर भी ब्राह्मण कहते है......।’’

  1. अश्वलान ने कोई उत्तर नहीं दिया।

  2. तब भगवान बुद्ध ने अश्वलायन से एक दूसरा प्रश्न पूछा।

  3. ‘‘मान लो, अश्वलायन, एक युवक क्षत्रिय एक ब्राह्मण कन्या के साथ सहवास

करता है, तो वह संतान क्या होगी? क्या एक जानवर होगा या मनुष्य?’’ 23. पुनः अश्वलायन ने कोई उत्तर नहीं दिया।