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2. धम्म तभी सद्धम्म है, जब वह शिक्षा दे कि मनुष्य का जन्म से नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर मूल्याकन किया जाना चाहिए
- ब्राह्मणों द्वारा उपदेशित चातुर्वर्ण का सिद्धांत जन्म पर आधारित था।
- कोई एक ब्राह्मण माता-पिता से जन्मा है इसलिए वह ब्राह्मण है। एक क्षत्रिय
इसलिए क्षत्रिय है, क्योंकि वह क्षत्रिय माता-पिता से जन्मा है। कोई एक वैश्य
इसलिए वैश्य है क्योंकि वह वैश्य माता-पिता से जन्मा है। और कोई एक शूद्र
इसलिए शूद्र है, क्योंकि कोई शूद्र माता-पिता से जन्मा है।
- ब्राह्मणों के अनुसार एक मनुष्य की योग्यता जन्म पर आधारित थी और किसी
पर नहीं।
- यह सिद्धांत बुद्ध के लिये उतना ही अरुचिकार था जितना कि चातुर्वर्ण का
सिद्धांत।
- उनका सिद्धांत ब्राह्मणों के सिद्धांत के ठीक विपरीत था। उनका सिद्धांत यह था
कि मनुष्य का मूल्यांकन जन्म से नहीं, बल्कि योग्यता से हो। 6. जिस अवसर पर बुद्ध ने अपना सिद्धांत प्रतिपादित किया था, उसका स्वयं अपना
विशेष महत्त्व है।
- एक बार तथागत अनाथपिण्डिक के जेतवना राम में ठहरे हुए थे। एक दिन
पूर्वाह्न में उन्होंने अपना भिक्षा-पात्र लिया और भिक्षा के लिये श्रावस्ती में प्रवेश
किया।
- उस समय एक यज्ञाग्नि प्रज्ज्वलित थी और आहुति तैयार की जा रही थी। तब
तथागत, श्रावस्ती में एक घर से दूसरे घर भिक्षाटन के लिए जाते हुए अग्गिक
के घर पहुँचे।
- तथागत को कुछ दूरी से आते हुए देख कर, ब्राह्मण क्रोधित हो गया और
बोला, ‘‘वहीं ठहर, ओ मुण्डक! वहीं, ठहर, हे दरिद्र भिक्षु! वहीं ठहर, दुखी
बृसल।’’
- जब वह इस प्रकार बोला, तथागत ने उसे सम्बोधित किया, ‘‘क्या तुम जानते
हो, हे ब्राह्मण! कौन सा बृसल (नीच) है, या कौन सी ऐसी बातें हैं, जो एक
मनुष्य को बृसल (नींच) बनाती हैं।’’
- ‘‘नहीं गौतम! मैं नहीं जानता कि कौन बृसल होता है। और अमल में मैं नहीं
जानता कि क्या करने से एक मनुष्य बृसल बनता है।’’
- तथागत ने कहा कि यदि तुम यह जान लोगे कि बृसल कौन होता है तो इससे