282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
तुम्हारी कुछ हानि नहीं होगी। ‘‘अब जब तुम इसे जानने के लिए जोर दे रहे
हो तो,’’ ब्राह्मण अग्गिक ने कहा, ‘‘अच्छा कहो और स्पष्ट करो।’’ 13. ब्राह्मण के द्वारा इच्छा प्रगट करने पर तथागत ने उससे कहा- 14. ‘‘मनुष्य जो क्रोधी, लोभी, अनैतिक, चुगलखोर, मिथ्या दृष्टि वाला, और वंचक
हो, तुम उसे एक बृसल जानो।’’
- ‘‘जो कोई भी इस संसार में एकज या द्विज (पक्षी आदि) सजीव प्राणियों को
हानि पहुँचाता है, जिसमें मन में प्राणियों के लिये कोई करुणा नहीं है-तुम उसे
बृसल जानो।’’
- ‘‘जो कोई भी गाँवों और झोपडि़यों को नष्ट करता और घेर लेता है, और एक
अत्याचारी के रूप में जाना जाता है-तुम उसे बृसल जानो।’’ 17. ‘‘भले ही गाँव में या जंगल में जो कोई भी चोरी द्वारा उन वस्तुओं को अपनी बना
लेता है जो दूसरों की हैं या जो दी नहीं गयी हैं-तुम उसे बृसल जानो।’’ 18. ‘‘वास्तव में जो कोई भी ऋण लेकर वापस नहीं करता, जब दबाव डाला जाता
है, तो यह कहते हुए कि मुझ पर तुम्हारा कोई ऋण नहीं है, भाग जाता है-तुम
उसे बृसल जानो।’’
- ‘‘क्षुद्र धनराशि की इच्छा से जो कोई भी सड़क पर अकेले जाते हुए एक मनुष्य
की हत्या करता है, और उसे लूटता है-तुम उसे बृसल जानो।’’ 20. ‘‘जो कोई भी स्वयं अपने लिये, या दूसरों के लिए या सम्पत्ति के लिए जब
एक गवाह के रूप में उससे पूछे जाने पर झूठी गवाही देता है-तुम उसे एक
बृसल जानो।’’
- ‘‘जो कोई भी बल से या सहमति से, सम्बन्धियों या मित्रों की पत्नियों के साथ
अनाचार करता है-तुम उसे एक बृसल जानो।’’
- ‘‘जो कोई भी, धनी होने पर भी, वृद्ध माता और पिता को सहारा नहीं देता
तुम उसे एक बृसल जानो।’’
- ‘‘जो कोई भी, जब किसी से कुशलता के विषय में जानना चाहता है, तो
अकुशलता का परामर्श देता है तथा रहस्यमय तरीके से शिक्षा देता है-तुम उसे
एक बृसल मानो।’’
- ‘‘कोई भी जन्म से बृसल नहीं होता-कोई भी जन्म से ब्राह्मण होता है।’’
- यह सुनकर, तथागत को कहे गये अपशब्दों के लिये अग्गिक बहुत लज्जित
हुआ।