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- सातवें दिन वह सवेरे जागी, सुगंधित जल में स्नान किया, दान में मुद्रा के चार
लाख सिक्के प्रदान किए, बहुमूल्य आभूषणों से अपने को सुसज्जित करके,
मनपसंद खाना खाकर, व्रत रखने की प्रतिज्ञा कर सुसज्जित राजकीय शयन-कक्ष
में प्रवेश कर गई।
- उस रात शुद्धोदन और महामाया संपर्क में आए और महामाया ने गर्भधारण किया।
राजकीय शय्या पर पड़े-पड़े उसे नींद आ गई और उसने एक स्वप्न देखा।
- स्वप्न में उसने देखा कि संसार के चतुर्दिक महाराजिक देवता उसे सोते हुए
चारपाई सहित उठा कर हिमाचल तलप्रदेश पर ले गए हैं और एक विशालकाय
शाल-वृक्ष के नीचे रख कर एक तरफ खड़े हो गए हैं।
- तब चार चतुर्दिक देवताओं की पत्नियां वहां आईं और उसे उठाकर मानसरोवर
झील ले गईं।
- उन्होंने उसे स्नान कराया सुंदर वस्त्र पहनाए, सुगंधित लेप किए और फूलों से
इस प्रकार सजाया ताकि वह दिव्यात्मा से मिलने योग्य हो सके।
- तब ‘सुमेध’ नाम का बोधिसत्व यह कहते हुए उसके समक्ष उपस्थित हुआ-‘‘मैंने
अपना अंतिम जन्म इस पृथ्वी पर लेने का निश्चय किया है, क्या तुम मेरी मां
बनना स्वीकार करोगी’’? उसने कहा-‘‘हां, बड़ी खुशी से।’’ ठीक उसी समय
महामाया की आखें खुल गईं।
- दूसरे दिन सुबह महामाया ने अपने स्वप्न के बारे में शुद्धोदन को बताया।
स्वप्न की व्याख्या करने में असमर्थ शुद्धोदन ने आठ ब्राह्मणों को बुलाया जो
स्वप्न-व्याख्या में विख्यात थे।
- उनके नाम थे राम, ध्वज, लक्ष्मण, मंती, यन्न, सुयाम, सुभोग और सुदत्त।
शुद्धोदन ने उनके लिए स्वागत की तैयारी की।
उसने जमीन पर सुंदर पुष्प बिछवाए और उनके लिए ऊंचे आसन लगवाए।
उसने ब्राह्मणों के पात्र सोने औेर चाँदी से भर दिए और उन्हें घी, मधु, शक्कर,
उत्तम चावल और दूध से पके पकवान खिलाए। उसने नए वस्त्र और कपिला
गायें जैसी अन्य भेंटें भी उन्हें दी।
- जब ब्राह्मण पूरी तरह संतुष्ट हो गए तब शुद्धोधन ने महामाया के स्वप्न के बारे
में उन्हें बताया और पूछा ‘‘मुझे बताएं कि इसका क्या अर्थ है?’’
- ब्राह्मणों ने कहा-‘‘आप चिंता न करें। आपके यहां एक पुत्र होगा और अगर