2. पूनर्जन्म किस (चीज) का? - Page 331

302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. यह कैसे हो सकता है कि ‘बुद्ध आत्मा’ के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करें

और फिर भी कहें कि वे एक उच्छेदवादी नहीं हैं?

  1. इससे प्रश्न उठता है, क्या बुद्ध पुनर्जन्म में विश्वास करते थे?

2. पुनर्जन्म किस (चीज) का?

  1. क्या बुद्ध पुनर्जन्म में विश्वास करते थे?

  2. उत्तर सकारात्मक ‘हाँ’ में है।

  3. यह अच्छा होगा कि इस प्रश्न को आगे दो भागों में बाँट दिया जाये_ (1)

पुनर्जन्म किस (चीज) का? और (2) पुनर्जन्म किस (व्यक्ति) का? 4. यह अच्छा होगा कि इन दो प्रश्नों में से प्रत्येक को पृथक-पृथक करके लिया

जाये।

  1. यहाँ हम पहले प्रश्न को ही लें, पुनर्जन्म किस (चीज) का? पर विचार

करेंगे।

  1. यह प्रश्न लगभग सदैव उपेक्षित रहा है। यह दोनों प्रश्नों के सम्मिश्रण के कारण

इसमें इतना अधिक भ्रम उत्पन्न हो गया है।

  1. भगवान बुद्ध के अनुसार चार भौतिक पदार्थ होते हैं जो शरीर को विकसित

करते हैं। वे हैं (1) पृथ्वी, (2) जल, (3) तेज (अग्नि) और (4) वायु। 8. प्रश्न है जब शरीर मर जाता है तो इन चार महाभूतों (अवयवों) का क्या होता

है? क्या वे भी शरीर के साथ मर जाते हैं? कुछ कहते हैं कि वे भी मर जाते

हैं।

  1. भगवान बुद्ध कहते हैं ‘नहीं’। वे आकाश में तैरते हुए समान महाभूतों (अवयवों)

के पुंज के साथ मिल जाते हैं।

  1. जब इस तैरते हुए पुंज से चार अवयव एक साथ पुनः मिल जाते हैं, तो एक

नया जन्म हो जाता है।

  1. भगवान बुद्ध का पुनर्जन्म से यही अभिप्राय था।

  2. अवयवों के लिये यह आवश्यक और अनिवार्य नहीं है कि वे उसी मृत शरीर

के हों। वे विभिन्न मृत शरीरों के अंग हो सकते हैं।

  1. यही बात ध्यान देने की है कि शरीर मरता है। किन्तु भौतिक पदार्थ (अवयव)

सदैव बने रहते हैं।