2. पूनर्जन्म किस (चीज) का? - Page 332

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  1. भगवान बुद्ध इसी प्रकार के पुनर्भव अर्थात् पुनर्जन्म पर विश्वास करते थे।
  2. सारिपुत्त ने महा-कोट्ठित के साथ जो बातचीत की, उसमें इस विषय पर काफी

प्रकाश डाला गया है।

  1. इस सन्दर्भ में ऐसा मिलता है कि एक बार जब भगवान श्रावस्ती में जेतवन

के अनाथपिण्डिकाराम में ठहरे हुए थे, तो महाकोट्ठित अपने ध्यान से उठने

के बाद, सारिपुत्त के पास गये और उनसे कुछ ऐसे प्रश्नों को स्पष्ट करने का

निवेदन किया, जो उन्हें परेशान कर रहे थे।

  1. उनमें से एक निम्नलिखित था।

  2. महाकोट्ठित ने पूछा, ‘‘प्रथम-ध्यान की प्राप्ति होने पर कितने संयोजनों का

प्रहाण होता है और कितने शेष रह जाते हैं?’’

  1. सारिपुत्र ने उत्तर दिया, ‘‘प्रत्येक के पांच-पांच। कामच्छन्द, व्यापाद, थीनमिद्ध

(आलस्य), उद्धच्च-कौंकृत्य तथा विचिकित्सा का प्रहाण हो जाता है। वितर्क,

विचार, प्रीति, सुख तथा एकाग्रता शेष रहते हैं।

  1. महाकोट्ठित ने पूछा, ‘‘चक्षु, श्रोत्र, घ्राण, जिह्वा और स्पर्श, इन पाँचों इन्द्रियों

को लें, प्रत्येक का अपना विषय और कार्य-क्षेत्र पृथक है तथा प्रत्येक एक-दूसरे

से पृथक और परस्पर भिन्न हैं। इनका अन्तिम आधार क्या है? कौन इन पाँचों

इन्द्रियों के विषयों और क्षेत्रों का उपभोग करता है?’’

  1. सारिपुत्त ने उत्तर दिय, ‘‘मन।’’

  2. महाकोट्ठित ने पूछा, ‘‘ये पांच इन्द्रियाँ किस पर निर्भर करती हैं?’’

  3. सारिपुत्त ने उत्तर दिया, ‘‘चेतना (जीवितेन्द्रिय) पर।’’

  4. महाकोट्ठित ने पूछा, ‘‘चेतना किस पर निर्भर करती है?’’

  5. सारिपुत्त, ‘‘ऊष्णता पर।’’

  6. महाकोट्ठित ने पूछा, ‘‘ऊष्णता किस पर निर्भर करती है?’’

  7. सारितपुत्त ने उत्तर दिया, ‘‘चेतना पर।’’

  8. महाकोट्ठित ने पूछा, ‘‘आप कहते हैं कि चेतना ऊष्णता पर निर्भर करती है,

आप यह भी कहते हैं कि ऊष्णता चेतना पर निर्भर करती है। इसका ठीक-ठीक

क्या अर्थ समझा जाये?’’

  1. सारिपुत्त ने उत्तर दिया, ‘‘मैं आपको एक उदाहरण देकर समझाता हूं जिस प्रकार

एक दीपक के प्रकाश से लौ प्रकट होती है और लौ से प्रकाश, उसी प्रकार