306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
रहे थे, और साकेत व श्रावस्ती के बीचोंबीच वे एक रात के लिये तोरणवत्थु
में रुके।
- कोशल के राजा प्रसेनजित ने एक किसी मनुष्य को बुलवाया और कहा, ‘‘अरे
भले आदमी! किसी भिक्षु या ब्राह्मण का पता लगा, जिसके साथ में आज संगत
कर सकूँ।’’
- ‘‘ऐसा ही होगा महाराज,’’ उस व्यक्ति ने कोशल के राजा प्रसेनजित को उत्तर
में कहा और सम्पूर्ण तोरणवत्थु में घूमने के पश्चात् उसे कोई भी श्रमण-ब्राह्मण
नहीं मिला, जिसके साथ राजा प्रसेनजित् संगत कर सकें।
- तब उस व्यक्ति ने भिक्षुणी खेमा को देखा, जो तोरणवत्थु में ठहरी हुई थीं। उनको
देखने के बाद वह कोशल के राजा प्रसेनजित के पास गया और बोला- 13. ‘‘महाराज! तोरणवत्थु में कोई ब्राह्मण या श्रमण नहीं है, जिसके साथ महाराज
संगत कर सकें। किन्तु, महाराज! खेमा नामक एक भिक्षुणी है, जो तथागत
की शिष्या है। उसके विषय में आजकल जनश्रुति चारों ओर फैली है, कि वह
अर्हत है, योग्य है, कुशल है, ज्ञानी है, एक निपुण वक्ता हैं और प्रत्युत्पन्नमति
हैं। महाराज! आप उसकी संगत करें।’’
- अतः कोशल का राजा प्रसेनजित भिक्षुणी खेमा से मिलने गया और उनके पास
पहुँच कर उन्हें अभिवादन कर एक ओर बैठ गया। इस प्रकार बैठे हुए उसने
उनसे कहा-
- ‘‘भिक्षुणी खेमा! आप इस विषय में क्या कहती हैं? क्या तथागत मरणोपरान्त
रहते हैं?’’
‘‘महाराज! यह तथागत द्वारा अव्याकृत है।’’
‘‘यह कैसे, भिक्षुणी खेमा! जब पूछा जाता है ‘‘क्या तथागत मरणोपरान्त रहते
हैं?’’ आप उत्तर देती हैं ‘‘यह तथागत द्वारा अव्याकुल रखा गया है, और जब
मैं..... अन्य प्रश्न पूछता हूँ, आप वहीं उत्तर देती हैं। कृपया! बताएं, क्या कारण
हैं, क्या हेतु है, क्यों यह बात तथागत द्वारा अव्याकुल रखी गयी हैं?’’ 18. ‘‘महाराज! इस विषय में अब मैं आपसे एक प्रश्न पूछती हूँ। आप जैसा उचित
समझें वैसा उत्तर दें। अब आप क्या कहते हैं, महाराज! क्या आपके पास कोई
लेखाकार या कोई शीघ्र गणना करने वाला गणक है, जो गंगा की रेत की गणना
करने में सक्षम हो, कितने सौ या इतने हजार या इतने लाख रेत के कण हैं?’’ 19. ‘‘निस्सन्देह, नहीं।’’