3. पुनर्जन्म किस (व्यक्ति) का? - Page 337

308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. ‘‘भगवन्! कृपया बताएं क्या तथागत मरणोपरान्त रहते हैं?’’

  2. ‘‘महाराज! यह विषय मेरे द्वारा अव्याकृत रखा गया है।’’

  3. ‘‘भगवन्! तो क्या तथागत मरणोपरान्त नहीं रहते हैं?’’

  4. ‘‘महाराज! यह भी मेरे द्वारा अव्याकृत रखा गया है।’

  5. तब राजा ऐसे अन्य प्रश्नों को पूछते हैं और वही उत्तर पाते हैं।

  6. ‘‘भगवन्! यह कैसे हैं, जब मैं पूछता हूँ, ‘क्या तथागत मरणोपरांत रहते हैं.......?

क्या वे मरणोपरान्त नहीं रहते हें?’ आप उत्तर देते हैं, यह मेरे द्वारा अव्याकृत

रखा गया है। भगवन! कृपया यह बताएं क्या कारण है, क्या हेतु है, यह बात

तथागत द्वारा क्यों अव्याकृत रखी गयी है?’’

  1. ‘‘तो महाराज! मैं आपसे प्रश्न पूछता हूँ, जैसा आप उचित समझें वैसा उत्तर

देना। तो आप क्या कहते हैं, महाराज? क्या आपके पास कोई लेखाकार है?

(शेष पूर्ववत्)।’’

  1. ‘‘अद्भुत है, भगवान! आश्चर्यजनक है, भगवान! किस प्रकार शास्ता और शिष्य

दोनों की व्याख्या में, न भाव और न शब्द की दृष्टि से कहीं कुछ भी अन्तर

नहीं है, एकदम समानता है और परस्पर-विरोध नहीं अर्थात् उच्चतम बातों के

बारे में एक भी शब्द पर।’’

  1. ‘‘भगवान! एक विशेष अवसर पर मैं भिक्षुणी खेमा के पास मिलने गया था, और

उनसे इस विषय का अर्थ पूछा था, और उन्होंने तथागत द्वारा प्रयुक्त इन्हीं शब्दों

में, इन्हीं अक्षरों में अर्थ बताया था। अद्भुत है, भगवान! यह आश्चर्यजनक है,

भगवान! किस प्रकार शास्ता और शिष्य दोनों की व्याख्या में, भाव और शब्द

दोनों की दृष्टि से, सहमति है, समानता है और परस्पर-विरोध नहीं है,-अर्थात्

उच्चतम बातों के बारे में एक भी शब्द पर।

  1. ‘‘अच्छा, भगवान! अब हमें चलना चाहिये। हम व्यस्त लोग हैं। हमें बहुत से

कार्य हैं।

  1. ‘‘महाराज, इस समय अब जो आप उचित समझते हैं, वैसा करें।’’
  2. तत्पश्चात् कोशल का राजा प्रसेनजित् तथागत के वचनों से प्रसन्न हुआ, उनका

हार्दिक स्वागत किया। और वह अपने आसन से उठा, तथागत को यथायोग्य

अभिवादन किया और चला गया।