2. क्या भगवान बुद्ध यह मानते थे कि अतीत कर्म भावी जीवन को प्रभावित करते हैं? - Page 341

312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. विज्ञान के अनुसार सोचें तो नये प्राणी का आरम्भ उस समय होता है, जब

वीर्य अण्ड में प्रवेश करता है। प्राणी को उत्पत्ति तभी होती हैं, जब वीर्य-कण,

रज-कण में प्रवेश करता है।

  1. प्रत्येक मनुष्य की उत्पत्ति जीवित पदार्थ के दो कणों के संयोजन से होती है-माता

का रज-कण, पिता का वीर्य कण।

  1. मनुष्य जन्म आनुवंशिक है, यह बुद्ध द्वारा एक यक्ष को बताया गया था, जब

इस विषय में चर्चा करने के लिये यक्ष उनके पास आता था। 20. उस समय तथागत राजगृह के समीप गृध्रकूट नामक पर्वत पर ठहरे हुए थे। 21. तथागत का कथन है तब एक यक्ष तथागत के समीप आया और उन्हें इस

प्रकार सम्बोधित किया, ‘शारीरिक स्वरूप जीवात्मा नहीं है’ तो जीव शरीरधारी

कैसे होता है? जीवन को यह हड्डियों व आंतों का ढेर कैसे प्राप्त होता है?

माता के गर्भ में जीव किस प्रकाट लटकता रहता है?

  1. इस पर तथागत ने उत्तर दिया, ‘‘सर्वप्रथम कलल होता है, और तत्पश्चात् अर्बुद।

उसमें से पेशी और आगे चलकर घन के रूप में विकसित हो जाती है। और

घन में ही बाल, नाखून इत्यादि उत्पन्न होते हैं। और जो कुछ भी खाना और

पीना उसकी माता लेती है, उससे बालक माता के गर्भ में जीवित रहता और

बढ़ता है।

  1. किन्तु हिन्दू सिद्धांत इससे सर्वथा भिन्न है।

  2. इसका कहना है कि शरीर तो आनुवंशिक है, किन्तु आत्मा नहीं है। यह बाहर

से शरीर में कहाँ से प्रवेश करती है? यह बात इस सिद्धांत में स्पष्ट नहीं की

गई है।

  1. दूसरा प्रश्न है कि पूर्व-जन्म के उस कर्म की स्थिति क्या है, यह अवश्य ही

निश्चित कर लिया जाना चाहिए कि क्या यह वंशानुगत गुण है या स्वयं अर्जित

किया हुआ कोई गुण है?

  1. जब तक इस प्रश्न का उत्तर उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक वंशानुगत के

वैज्ञानिक सिद्धांत के अनुसार परीक्षण नहीं किया जा सकता। 27. किन्तु मान लिया जाये कि इस प्रश्न का इधर या उधर कुछ भी उत्तर है तो भी

विज्ञान से कोई सहायता लेना, कैसे सम्भव है कि यह एक बुद्धिसंगत सिद्धांत

है या मूर्खतापूर्ण सिद्धांत।

  1. विज्ञान के अनुसार एक बच्चा अपने माता-पिता के गुण वंशानुगत प्राप्त करता