320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
विभाग - चार
संसरण
(आत्मा का एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश करना)
- भगवान बुद्ध ने पुनर्जन्म की देशना की है, किन्तु भगवान् बुद्ध ने यह भी देशना
की है कि कोई संसरण नहीं है।
- ऐसे लोगों की कमी नहीं थी, जिन्हों भगवान बुद्ध की आलोचना यह देशना
करने के कारण की थी जिसे वे दो परस्पर विरोधी सिद्धान्त मानते थे। 3. आलोचकों ने पूछा था, पुनर्जन्म कैसे हो सकता है, जब तक कि संसरण न
हो?
- वे कहते थे कि यह बिना संसरण के पुनर्जन्म का मामला है, क्या यह हो
सकता है?
- इसमें कोई अन्तर्विरोध नहीं है, यद्धपि बिना संसरण के पुनर्जन्म हो सकता है।
- राजा मिलिन्द के प्रश्नों के अपने उत्तर में यह भलि-भांति भदन्त नागसेन द्वारा
स्पष्ट किया गया है।
- बैक्ट्रिया के राजा मिलिन्द ने नागसेन से पूछा-‘‘क्या भगवान बुद्ध पुनर्जन्म
(संसरण) में विश्वास करते थे?’’
स्थाविर नागसेन का उत्तर था- ‘‘हाँ’’?
‘‘क्या यह एक अन्तर्विरोध नहीं?’’
नागसेन ने उत्तर दिया- ‘‘नहीं।’’
‘‘क्या बिना आत्मा के पुनर्जन्म हो सकता है?’’
स्थविर नागसेन ने कहा, ‘‘बेशक, हाँ, ऐसा हो सकता है।’’
‘‘कृपया स्पष्ट करें यह कैसे हो सकता है।’’
राजा ने कहा, ‘‘जहाँ संसरण नहीं है, नासगेन! क्या वहाँ पुनर्जन्म हो सकता
है?’’
‘‘हाँ, हो सकता है।’’
‘‘किन्तु, यह कैसे हो सकता है? मुझे एक उदाहरण देकर समझाएं।’’
‘‘हे राजन्! मान लो एक व्यक्ति एक दीपक से दूसरा दीया जलाये, तो क्या