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यह कहा जा सकता है कि एक का संसरण दूसरे में हो गया है?’’ 18. ‘‘निश्चय से नहीं।’’
‘‘महाराज! ठीक इसी प्रकार पुनर्जन्म बिना संसरण के होता है।’’
‘‘मुझे एक और उदाहरण दें।’’
‘महाराज! क्या आपको कोई छन्द (कविता का चरण) याद है, जो आपने
बचपन में अपने आचार्य से सीखा हो।’’
‘‘हाँ, मुझे याद हैं।’’
‘‘तो क्या वह छन्द आपके आचार्य से संसरण हुआ था?’’ अर्थात् ‘‘क्या आचार्य
के मुँह से निकलकर आपके मुँह में आ गया?’’
‘‘निश्चय से नहीं।’’
‘‘महाराज! ठीक इसी प्रकार पुनर्जन्म, बिना संसरण के होता है।’’
‘‘बहुत अच्छा, नागसेन!’’
राजा ने कहा, ‘‘नागसेन! क्या ‘आत्मा’ जैसी कोई चीज होती है?’’
‘‘हे राजन्! यथार्थ में आत्मा जैसी कोई चीज नहीं है।’’
‘‘बहुत अच्छा, नागसेन।’’