विभाग - पांच, भ्रम के कारण - Page 351

322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

विभाग - पाँच

भ्रम के कारण

  1. भगवान बुद्ध ने जो उपदेश दिए थे वे उनके श्रोताओं द्वारा सुने जाते थे, जिनमें

अधिकांशतः भिक्षु होते थे।

  1. ये भिक्षु ही थे, जो भगवान बुद्ध के द्वारा कही गई बात को जन-साधारण तक

पहुंचाते थे।

  1. उस समय तक लिखने की कला विकसित नहीं हुई थी। इसलिये भिक्षु जो

कुछ सुनते थे उन्हें कण्ठस्थ करना पड़ता था। प्रत्येक भिक्षु जो उसे सुनाता

था उसे कण्ठस्थ करने की चिन्ता नहीं करता था किन्तु कुछ ऐसे भिक्षु थे,

जिन्होंने कण्ठस्थ करना अपना काम बना लिया था। वे ‘भाणक’ कहलाते थे। 4. बौद्ध त्रिपिटक और उसकी अट्ठकथाएं इतनी विशाल हैं, जैसे कि समुद्र। इन

सबको कण्ठस्थ करना वास्तव में एक असाधारण कार्य था। 5. एक से अधिक बार ऐसा हुआ कि भगवान बुद्ध ने जो कुछ कहा उसकी

रिपोर्टिंग गलत हुई।

  1. गलत रूप से प्रस्तुत किये गए अनेक मामले भगवान बुद्ध की जानकारी में लाये

गये थे, जब वे जीवित थे।

  1. उदाहरण के तौर पर पाँच ऐसे मामलों का उल्लेख किया जा सकता है। एक का

उल्लेख अलगद्दुपम सुत्त में, दूसरा महाकम्म विभंग सुत्त में, तीसरा कण-कट्ठल

सुत्त में चौथे का महातण्हा-संख्या सुत्त में और पाँचवें का जीवक सुत्त में है। 8. सम्भवतः गलत रूप से प्रस्तुत किये जाने के अन्य अनेक ऐसे मामले आए हों,

जब तथागत के वचनों की ठीक ‘रिपोर्ट’ न हुई हो। क्योंकि हम देखते हैं कि

भिक्षु भी भगवान बुद्ध के पास गए हैं और प्रश्न किया है, ऐसी परिस्थितियों

में उन्हें क्या करना चाहिये?

  1. ‘कर्म’ और ‘पुनर्जन्म’ के सम्बन्ध में जब-जब गलत रिपोर्ट हुई है, ऐसे मामले

तो अनेक हैं।

  1. इन सिद्धान्तों का ब्राह्मणवादी धर्म में भी एक स्थान है, अतः भाणकों के लिये

ब्राह्मणवादी सिद्धान्तों को बौद्ध धर्म में समाविष्ट कर देना सरल था। 11. इसलिये बौद्ध-त्रिपिटक में जो कुछ भी बुद्ध-वचन के रूप में कहा गया है,

उसे स्वीकार करने में अत्यन्त सावधानी की आवश्यकता है।