12. सम्यक् मार्ग का अनुसरण - Page 369

340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

जीवन व्यतीत करनेवाला और जो विवेक-प्रेमी है, उसके लिये जीवन सदैव

कठिन है।

  1. क्या संसार में कोई ऐसा निर्दोष एक भी व्यक्ति है कि वह निन्दा के लिये कोई

अवसर नहीं देता, जैसे उत्तम घोड़ा अपने सवार को कभी चाबुक के वार का

कोई अवसर नहीं देता? एक उत्तम घोड़े के समान उत्तेजक व दु्रतगामी बनो,

जिसे चाबुक की आवश्यकता न पड़े।

  1. किसी से कठोर वचन मत बोलो, क्योंकि दूसरे भी फिर वैसा ही प्रत्युत्तर देंगे।

क्रोधयुक्त वाणी दुखद है, किसी पर भी प्रहार करोगे, तो तुम पर भी प्रहार

होगा।

  1. स्वतन्त्रता, उदारता, सदाशयता और निस्वार्थता का संसार के लिये ये वैसे महत्त्वपूर्ण

है, जैसे रथ के पहिये के लिये पहिये की धुरी।

  1. यही बौद्ध जीवन-मार्ग है।

11. ढोंग

  1. कोई भी झूठ न बोले। कोई भी दूसरे को झूठ बोलने की प्रेरणा न दे और न

ही ऐसे व्यक्ति के कार्य का समर्थन करे, जो झूठ बोलता है। प्रत्येक प्रकार का

झूठ और मिथ्या-भाषण से दूर ही रहे।

  1. जैसा तथागत बोलते हैं, वैसा ही आचरण करते हैं। जैसा तथागत आचरण करते

हैं, वैसा ही बोलते हैं और क्योंकि वे यथाभाषी तथाकारी हैं, इसीलिये वे तथागत

कहलाते हैं।

  1. यही बौद्ध जीवन-मार्ग है।

12. सम्यक् मार्ग के अनुसरण

  1. सम्यक् मार्ग को चुनो। इससे विचलित मत होओ।

  2. यों तो अनेक पथ हैं, किन्तु सभी सम्यक् मार्ग की ओर नहीं जाते।

  3. सम्यक् मार्ग केवल कुछ लोगों के सुख के लिये नहीं, बल्कि सभी के सुख

के लिए हैं।

  1. यह आदि में कल्याणकारी होना चाहिये, मध्य में कल्याणकारी होना चाहिये

और अन्त में कल्याणकारी होना चाहिये।

  1. सम्यक् मार्ग के अनुसरण करने का अर्थ बौद्ध जीवन-मार्ग पर चलना है।
  2. सर्वश्रेष्ठ मार्ग आष्टांगिक मार्ग है, सर्वश्रेष्ठ सत्य चार आर्य सत्य है, सर्वश्रेष्ठ