4. असित का आगमन - Page 37

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. तब असित राजा शुदोदन के पास गए और उसके सामने खड़े होकर बोले-‘‘राजन!

तुम्हारी जय हो। तुम्हारी जय हो। तुम दीर्घायु हों और अपने राज्य का धर्मानुसार

शासन करें।’’

  1. तब शुद्धोदन ने असित के आदरपूर्वक असित ऋषि के चरणों में साष्टांग प्रणाम

किया और उनसे आसन पर बैठने का आग्रह किया और उन्हें आराम से बैठे हुए

देखकर शुद्धोदन ने पूछा-‘ऋषिवर! मुझे स्मरण नहीं कि इससे पूर्व कभी आपके

दर्शन हुए हों। आपके यहां आने का क्या उद्देश्य है? क्या कारण है?’’

  1. तब असित ने राजा शुद्धोदन से कहा-‘‘राजन! तुम्हें पुत्र-लाभ हुआ है, मैं उसे

देखने की इच्छा से यहां आया हूं।’’

  1. शुद्धोदन ने कहा-‘‘ऋषिवर! बालक सोया हुआ है। क्या आप थोड़ी देर प्रतीक्षा

करेंगे।’’ ऋषि ने कहा-‘‘राजन! ऐसी महान् विभूतियां देर तक नहीं सोई रहतीं।

ऐसी विभूतियां स्वभाव से ही जागरूक होती हैं।’’

  1. तब बालक ने असित ऋषि पर अनुकम्पा करके जाग्रत होने का संकेत दिया।

  2. यह देखकर कि बालक जग गया है, शुद्धोदन अपने दोनों हाथों से बालक को

अच्छी तरह संभालकर असित के पास ले आए।

  1. असित ने देखा कि बालक बत्तीस महापुरुष-लक्षणों और अस्सी अनुव्यंजनों से

युक्त है, उसका शरीर शुक्र और ब्रह्मा से भी बढ़कर है और उसका तेजोमंडल

उनसे लाखों गुणा अधिक दीप्तमान है। ऋषि के मुख से अनायास ही यह पवित्र

शब्द निकले-‘‘निस्संदेह जगत में अच्छा हुआ, यह अद्भुत पुरुष में आविर्भूत

हुआ है।’’ ऋषि ने आसन से उठकर दोनों हाथ जोड़े और उसके पैरों पर

गिर पड़े। उन्होंने बालक की परिक्रमा की और उसको अपने हाथों में लेकर

विचार-मग्न हो गए।

  1. असित ऋषि को पूर्व भविष्यवाणी जानते थे कि जिसके शरीर में गौतम की

तरह बत्तीस महापुरुष-लक्षण होंगे, उसकी केवल दो ही गतियों में से एक ही

होगी तीसरी नहीं। ‘‘यदि वह गृहस्थ जीवन में रहा तो वह चक्रवर्ती सम्राट

बनेगा, लेकिन यदि वह घर को त्यागकर प्रव्रजित हो गया तो वह सम्यक् सम्बुद्ध

बनेगा।’’

  1. असित ऋषि पूर्ण आश्वस्त थे कि यह बालक गृहस्थ-जीवन में नहीं रहेगा।

  2. बालक की ओर देखकर वे सिसकियां भरकर रोने लगे और आंसू बहाने लगे।