347
- जिस समय राजा तथागत के साथ बातचीत करने में व्यस्त थे, उस समय
राजमहल से एक सन्देशवाहक आया और राजा के निकट जाकर, उनके कान
में चुपके से सूचित किया कि रानी मल्लिका ने एक पुत्री को जन्म दिया है। 3. राजा अत्यन्त दुखी और खिन्न मन हो गया। तथागत ने राजा से उनकी उदासी
का कारण पूछा।
- राजा ने उत्तर दिया कि उन्होंने अभी-अभी एक दुखद समाचार प्राप्त किया है
कि रानी मल्लिका ने एक पुत्री को जन्म दिया है।
- तत्पश्चात् तथागत ने विषय को देखते हुए कहा, ‘‘हे महाराज! एक पुत्री एक
पुत्र की तुलना में अच्छी सन्तान सिद्ध हो सकती है, क्योंकि बुद्धिमति और
सुशीला हो, अपने पति के माता-पिता का आदर करने वाली, सच्ची पत्नी, एक
लड़की ही बन सकती है।’’
- जिस पुत्र को वह जन्म दे सम्भवतः वह महान कार्य करे और विशाल क्षेत्रों पर
राज्य करे। हाँ, एक श्रेष्ठ पत्नी का ऐसा पुत्र अपने राष्ट्र का पथ-प्रदर्शक बन
सकता है।
3. पति और पत्नी
- एक समय तथागत मथुरा और वैरुंज्जा के मध्य महापथ पर जा रहे थे। साथ
ही अनेक गृहस्थ और उनकी पत्नियाँ भी मथुरा और वैरुज्जा के मध्य महापथ
पर मिल गये थे।
- तब तथागत मार्ग को छोड़कर एक वृक्ष के नीचे आसन लगाकर बैठ गए और
इन गृहस्थों और उनकी पत्नियों ने तथागत को वृक्ष के नीचे बैठा देखा। 3. इस प्रकार देखकर वे वहाँ आये जहाँ तथागत बैठे थे। आकर उन्होंने तथागत
को प्रणाम किया और एक ओर बैठ गये तथा तथागत से पूछा कि पति और
पत्नी के मध्य उचित सम्बन्ध कैसे होने चाहिये। इस प्रकार बैठे गृहस्थों और
उनकी पत्नियों से तथागत इस प्रकार बोलेः
- ‘‘गृहस्थो! पति और पत्नी के इकट्ठे रहने के चार तरीके हैं। एक दुष्ट मनुष्य
एक दुष्ट स्त्री के साथ रहता है, एक दुष्ट मनुष्य एक देवी के साथ रहता है,
एक देवता एक दुष्ट स्त्री के साथ रहता है और एक देवता एक देवी के साथ
रहता है।’’
- ‘‘गृहस्थो! एक पति हत्या करता है, चोरी करता है, व्यभिचार करता है, झूठ