348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
बोलता है और नशीले द्रव्यों का सेवन करता है, दुष्ट और पापी है, कृपणता से
ग्रस्त मन से वह एक गृहस्थ का जीवन जीता है और सदाचारी लोगों को गाली
देता है और निन्दा करता है। उसकी पत्नी भी हत्या करती है, चोरी करती है,
व्यभिचार करती है, झूठ बोलती है और नशीले पदार्थ का सेवन करती है, दुष्ट
और पापी है। कृपणता से ग्रस्त मन से वह पारिवारिक जीवन व्यतीत करती है
तथा सदाचारी लोगों को गाली देती है और निन्दा करती है। इस प्रकार निस्संदेह,
गृहस्थ! एक दुष्ट मनुष्य एक दुष्ट स्त्री के साथ रहता है।’’
- ‘‘गृहस्थो! एक पति हत्या करता है, चोरी करता है, व्यभिचार करता है, झूठ
बोलता है और नशीले द्रव्यों का सेवन करता है, दुष्ट और पापी है, कृपणता
से ग्रस्त मन से वह एक गृहस्थ का जीवन व्यतीत करता है और सदाचारी
लोगों को गाली देता है और निन्दा करता है। किन्तु उसकी पत्नी हत्या करने,
चोरी करने, व्यभिचार करने, झूठ बोलने और नशीले द्रव्यों का सेवन करने से
दूर रहती है। उसकी पत्नी सुशील और अच्छे स्वभाव की है, कृपणता के दोष
से मुक्त मन के साथ, वह परिवारिक जीवन व्यतीक करती है और सदाचारी
लोगों को न तो गाली देती है और न ही निन्दा करती है। इस प्रकार निस्संदेह,
गृहस्थो, एक दुष्ट मनुष्य एक देवी के साथ रहता है।’’
- ‘‘गृहस्थो! एक पति हत्या करने, चोरी करने, व्यभिचार करने, झूठ बोलने और
नशीले द्रव्यों का सेवन करने से दूर रहता है, सुशील और अच्छे स्वभाव का है,
कृपणता के कलंकों से मुक्त मन के साथ वह एक परिवारिक जीवन व्यतीत
करता है, और सदाचारी लोगों को न तो गाली देता है और न ही निन्दा करता
है। किन्तु उसकी पत्नी हत्या करती है, चोरी करती है, व्यभिचार करती है। झूठ
बोलती है और नशीले द्रव्यों का सेवन करती है, दुष्ट और पापी है। कृपणता
से ग्रस्त मन के साथ वह पारिवारिक जीवन व्यतीत करती है और सदाचारी
लोगों को गाली देती है और निन्दा करती है। इस प्रकार निस्संदेह, गृहस्थो! एक
देवता एक दुष्ट स्त्री के साथ रहता है।’’
- ‘‘गृहस्थो! इसमें, एक पति और एक पत्नी दोनों हत्या करने, चोरी करने,
व्यभिचार करने, झूठ बोलने और नशीले द्रव्यों का सेवन करने से दूर रहते हैं,
सुशील और अच्छे स्वभाव के हैं, कृपणता के दोषों से मुक्त मन के साथ वे
पारिवारिक जीवन व्यतीत करते हैं, सदाचारी लोगों को न तो गाली देते हैं और
न ही निन्दा करते हैं। इस प्रकार निःसंदेह, गृहस्थो! एक देवता एक देवी के
साथ रहता है।’’
- ‘‘गृहस्थो! ये इकट्ठे रहने के चार तरीके हैं।’’