1. मनुष्य का पतन कैसे होता है? - Page 378

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परिच्छेद - दो

सुचरित्र बने रहने के लिये प्रवचन

1. मनुष्य का पतन कैसे होता है?

  1. एक अवसर पर तथागत श्रावस्ती के निकट अनाथपिण्डिक के जेतवनाराम में

निवास कर रहे थे।

  1. अब जब रात पर्याप्त बीत चुकी थी तो एक देवता जिसने प्रकाश ने सारे

जेतवन को प्रकाशित कर दिया था, तथागत के पास आया और समीप पहुँचकर,

आदरपूर्वक उनका अभिवादन किया और एक ओर खड़ा हो गया। इस प्रकार

खड़े होकर उसने तथागत को सम्बोधित किया।

  1. ‘‘तथागत! मैं आपकी सेवा में प्रश्न पूछने के लिये आया हूँ, हे गौतम! कृपया

मुझे मनुष्य के पतन का कारण बतायें?’’ तथागत ने मनुष्य के पतन के कारणों

की व्याख्या करना स्वीकार किया।

  1. ‘‘उन्नतिशील मनुष्य सरलता से जाने जाते हैं, पतनोन्मुख मनुष्य भी सरलता से

जाने जाते हैं। धम्म से प्रेम करने वाले उन्नतिशील मनुष्य होते हैं, धम्म से घृणा

करने वाला पतनोन्मुख मनुष्य।’’

  1. ‘‘दुष्ट उसे प्रिय लगते हैं, सदाचारियों में वह रुचि नहीं रखता। उसे दुष्टों के

मत अच्छे लगते हैं - यह मनुष्य के पतन का दूसरा कारण है।’’ 6. ‘‘जो मनुष्य निद्रालु, भीड़-भाड़ में मस्त रहने वाला, अपरिश्रमी, प्रमादी और जो

क्रोध को व्यक्त करता है - यह मनुष्य के पतन का तीसरा कारण है।’’ 7. ‘‘जो कोई धनी होते हुए भी अपने वृद्ध माता और पिता को सहारा नहीं देता,

जिन्होंने अपना यौवन व्यतीत कर दिया है - यह मनुष्य के पतन का चौथा

कारण है।’’

  1. ‘‘वह जो झूठ बोलकर किसी भले आदमी (ब्राह्मण) या श्रमण या किसी अन्य

साधु (श्रेष्ठ व्यक्ति) को ठगता है - यह मनुष्य के पतन का पाँचवा कारण

है।’’

  1. ‘‘वह जो बहुत सम्पत्ति का स्वामी है, जिसके पास बहुत धन-धान्य पदार्थ हैं,

किन्तु अकेला ही खाद्यों का उपभोग करता है - यह मनुष्य के पतन का छठा

कारण है।’’