350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- ‘‘जो मनुष्य जन्म या सम्पत्ति या जाति या वंश का अभिमान करता है और
स्वयं अपने सम्बन्धियों की उपेक्षा करता है - यह मनुष्य के पतन का सातवाँ
कारण है।’’
- ‘‘जो मनुष्य एक व्यभिचारी, शराबी, जुआरी है, जो कुछ भी उसके पास में
है, उसे ऐशोआराम से उड़ा देता है - यह मनुष्य के पतन का आठवाँ कारण
है।’’
- ‘‘अपनी पत्नी से सन्तुष्ट न होकर, यदि कोई मनुष्य वेश्याओं तथा दूसरों की
पत्नियों के मध्य देखा जाता है - यह मनुष्य के पतन का नौवाँ कारण है।’’ 13. ‘‘वह जो एक असंयमी, फिजूल खर्च वाली स्त्री या समान प्रवृत्ति के मनुष्य
को अधिकारी बनाता है - यह मनुष्य के पतन का दसवाँ कारण है।’’ 14. ‘‘वह जो, अल्प साधनयुक्त होते हुए विशाल महत्वाकांक्षा के कारण, क्षत्रिय
कुल का होकर, राजा बनने की आकांक्षा करता है - यह मनुष्य के पतन का
ग्यारहवां कारण है।’’
- ‘‘हे कुलीन देव! पतन के इन कारणों को जान लो और यदि तुम इनसे बचे
रहे तो तुम सुरक्षित बच जाओगे।’’
2. दुष्ट मनुष्य
- चारिका करते समय तथागत ने अपनी सामान्य आदत के अनुसार, साथ चल
रहे भिक्षुओं को निम्नलिखित उपदेश दियाः-
- भिक्षुओं को सम्बोधित करते हुए तथागत ने कहा, ‘‘क्या तुम जानते हो कि दुष्ट
मनुष्य की पहचान क्या होती है?’’ ‘‘नहीं, भगवन्!’’ भिक्षुओं ने उत्तर दिया। 3. ‘‘मैं तुम्हें एक दुष्ट मनुष्य के लक्षण बतलाऊँगा।’’
- ‘‘कोई-कोई मनुष्य होता है, जो पूछे जाने पर तो कहना ही क्या, बिना पूछे ही
अन्य लोगों की दुर्गुणों का वर्णन करता है। निस्संदेह पूछे जाने पर, बार-बार
प्रश्न किए जाने पर, वह अन्य लोगों के विषय में बिना ढके या छिपाये, बल्कि
पूर्ण विस्तार से बुरा कहता है। भिक्षुओं! ऐसा मनुष्य दुष्ट मनुष्य होता है।’’ 5. ‘‘कोई-कोई मनुष्य ऐसा होता है जो न पूछे जाने की बात का कहना ही, पूछे
जाने पर भी अन्य लोगों के अच्छे गुणों को नहीं कहता है। निस्संदेह पूछे जाने
पर और बार-बार प्रश्न किए जाने पर, वह अन्य लोगों के विषय में अच्छा
कहता है।’’