356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
परिच्छेद - तीन
सदाचरण संबंधी प्रवचन
1. सदाचरण क्या है?
- एक बार जब विशाल संघ के साथ भगवान बुद्धि चारिका कर रहे थे, वे कोसल
जनपद के शाला नामक एक ब्राह्मण गाँव में पहुंचे।
- शाला ग्राम के ब्राह्मण मुखियों के कानों तक यह बात पहुंची कि तथागत चारिका
करते-करते कोसल-जनपद में स्थित उनके गांव में आये हैं।
- उन्होंने अनुभव किया कि दर्शनार्थ जाकर उनसे मिलना अच्छा है। अतः शाला
ग्राम के ब्राह्मण तथागत के पास गये और कुशल-क्षेम पूछकर एक ओर अपने
आसनों पर बैठ गये।
- उन्होंने तथागत से पूछा कि क्या वे उनको बता सकेंगे कि सदाचरण से उनका
क्या अभिप्राय है।
- अतः सुनने के लिए उद्धत ब्राह्मणों से तथागत ने कहा, ‘‘शरीर के तीन दुराचरण
और दुष्टताएँ होती हैं, वाणी के चार दुराचरण होते हैं और तन के तीन दुराचरण
होते हैं।’’
- ‘‘जहाँ तक शारीरिक दुराचरण का संबंध है, एक मनुष्य (i) रक्त-रंजित हाथों
से, शिकारी के रूप में, हत्या और वध करने का आदी होने के कारण सजीव
प्राणियों के प्रति निर्दयी होने के कारण हत्याएँ करता है_ या (ii) गांव और जंगल
में अन्य लोगों की वस्तुएँ चोरी की नीयत से बिना दिए हुए ही ले सकता है
जो उसकी नहीं हैं_ या (iii) माँ या पिता या भाई या बहन या संबंधियों की
निगरानी में रहने वाली लड़कियों से व्यभिचार करता है, हाँ, मँगनी हुई लड़कियों
के साथ, और यहां तक कि मंगली की मालायें पहनी हुई लड़कियों के साथ
भी संसर्ग करता है।’’
- ‘‘जहाँ तक वाणी के दुराचारण का सबंध है, एक मनुष्य (i) एक झूठ बोल
सकता है, जब सभा या ग्राम-पंचायक या पारिवारिक-परिषद या राजकीय-परिषद
या अपने संघ में साक्ष्य देने के लिये बुलाया जाये, तो वह कह सकता है कि
वह जानता है, जबकि वह नहीं जानता या कि वह नहीं जानता, जबकि वह
जानता है, या कि उसने देखा है जबकि उसने नहीं देखा है, जबकि उसने देखा
है तो वह अपने या अन्य लोगों के हित या किसी तुच्छ लाभ के लिये जान-बूझ